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अब कृषि भूमि पर भी वैध कॉलोनी विकास संभव

किफायती जन आवास नियम -2025

छोटे भू-स्वामियों को पहली बार योजनाबद्ध कॉलोनी विकसित करने का अवसर
कोरबा 02 फरवरी 26/ राज्य सरकार द्वारा जारी किफायती जन आवास नियम-2025 ने आम नागरिकों, छोटे भू-स्वामियों और मध्यम स्तर के बिल्डर्स के लिए नए अवसर प्रदान किए हैं। नई नियमावली के अंतर्गत अब कृषि भूमि पर भी विधिवत आवासीय कॉलोनी विकसित की जा सकेगी। इस कदम से वर्षों से बढ़ती अवैध प्लॉटिंग पर प्रभावी रोक लगेगी और निम्न एवं मध्यम वर्गीय परिवारों को सुव्यवस्थित, सुरक्षित और किफायती आवासीय सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

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नई नीति में पहली बार छोटे भू-स्वामियों को भी योजनाबद्ध ढंग से कॉलोनी विकसित करने का अवसर दिया गया है। इसके लिए न्यूनतम भूमि सीमा 2 एकड़ और अधिकतम 10 एकड़ निर्धारित की गई है, जिससे कम भूमि वाले किसान और भू-स्वामी भी बिना बड़े निवेश के कॉलोनी विकास कर सकेंगे। यदि प्रस्तावित योजना निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप स्वीकृत हो जाती है, तो कृषि भूमि का भू-उपयोग परिवर्तन स्वतः आवासीय श्रेणी में मान्य माना जाएगा।
किफायती जन आवास की परिभाषा भी स्पष्ट की गई है, जिसके तहत भूखण्ड का अधिकतम क्षेत्रफल 150 वर्गमीटर और फ्लैट या प्रकोष्ठ इकाई का अधिकतम आकार 90 वर्गमीटर तय किया गया है। इन मानकों से आवास की कीमतें नियंत्रित रहेंगी तथा खरीदारों को नगर एवं ग्राम निवेश तथा रेरा द्वारा स्वीकृत कॉलोनियों में सुरक्षित निवेश का भरोसा मिलेगा।
सरकार ने कॉलोनी विकास से जुड़े मानकों में भी महत्वपूर्ण शिथिलता प्रदान की है। पहुंच मार्ग और आंतरिक सड़कों की चौड़ाई से संबंधित पूर्व निर्धारित नियमों में ढील दी गई है, जिससे छोटे स्तर पर भी योजनाबद्ध कॉलोनी विकसित करना आसान हो गया है। प्रत्येक जन आवास कॉलोनी में सामुदायिक खुला स्थान, आवश्यक एमेनिटीज, कम्युनिटी हॉल, क्लब हाउस और सीमित व्यवसायिक क्षेत्र आरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है, ताकि निवासियों को सभी मूलभूत सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध हो सकें।
कॉलोनी विकास के लिए आवेदन की प्रक्रिया भी सरल बनाई गई है। एकल आवेदक के साथ-साथ अब संयुक्त या अनुबंध आधारित आवेदन की सुविधा उपलब्ध है, जिससे बिल्डर्स एवं भूमि स्वामियों के लिए नए निवेश अवसर पैदा होंगे। यह नई व्यवस्था केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी छोटे भूखण्डों पर नियोजित और सुरक्षित कॉलोनी विकास को बढ़ावा देगी।
नई नीति के लागू होने से राज्य में आवास विकास के क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी, अवैध प्लॉटिंग पर रोक लगेगी और आम नागरिकों को किफायती तथा व्यवस्थित कॉलोनियों में आवास प्राप्त करने का अवसर सुलभ होगा।

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प्रखरभूमि एक RNI में पंजीकृत साप्ताहिक समाचार पत्र है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2013 में हुई। अब इसका डिजिटल संस्करण भी इस वेबसाइट के माध्यम से पाठकों तक उपलब्ध है, जहां छत्तीसगढ़ सहित देश-दुनिया की महत्वपूर्ण और विश्वसनीय खबरें प्रकाशित की जाती हैं।

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