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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के इस स्कूल से विवादित शिक्षिका की हुई छुट्टी…कलेक्टर ने जारी किया आदेश

 

 

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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित सरकंडा स्थित पंडित रामदुलारे दुबे स्कूल एक बार फिर विवादों के घेरे में था। ताजा विवाद यहां की प्रभारी प्राचार्य पूर्णिमा मिश्रा से जुड़ा हुआ था, जिस पर स्कूल के ही दो शिक्षकों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कलेक्टर, एसपी और जिला शिक्षा अधिकारी से शिकायत की थी।

 

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित सरकंडा स्थित पंडित रामदुलारे दुबे स्कूल एक बार फिर विवादों के घेरे में था। ताजा विवाद यहां की प्रभारी प्राचार्य पूर्णिमा मिश्रा से जुड़ा हुआ था, जिस पर स्कूल के ही दो शिक्षकों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कलेक्टर, एसपी और जिला शिक्षा अधिकारी से शिकायत की थी।

शिकायतकर्ता शिक्षक में से पुरुष शिक्षक जहां दिव्यांग है वहीं महिला शिक्षिका अनुसूचित जनजाति वर्ग से आती है। दोनों ने प्रभारी प्राचार्य पर जिस प्रकार के गंभीर आरोप लगाए थे वह बताने के लिए काफी है कि आखिरकार स्कूल फिर से एक बार सुर्खियों में क्यों आ गया था। प्रभारी प्राचार्य वही शिक्षिका हैं जिसे पिछले बार छात्र-छात्राओं और प्राचार्य से विवाद के चलते जिला शिक्षा अधिकारी ने 10 माह के लिए स्कूल से बाहर का रास्ता दिखाया था और इस बार भी विवाद के बाद जहां विभागीय जांच हुई उसके बाद कलेक्टर ने आदेश जारी कर विवादित शिक्षिका पूर्णिमा मिश्रा को आगामी आदेश पर्यंत तक के लिए पंडित रामदुलारे दुबे स्कूल से हटाकर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सेंदरी में पदस्थ कर दिया है ।

 

दरअसल पंडित रामदुलारे दुबे स्कूल में आज से एक माह पहले स्कूली छात्रों में गैंगगवार की घटना हुई थी, जिसमें एक छात्र का सिर फट गया था और सात टांके लगे थे और उसके ठीक 5 दिन बाद स्कूल में कुछ छात्र नेताओं का भ्रमण हुआ था, कक्षा का निरीक्षण कर चुनिंदा छात्रों से बातचीत कर वीडियो तैयार किया था। बाद में सोशल मीडिया में जमकर वायरल भी हुआ और जिसके चलते अन्य छात्र संगठनों ने आपत्ति दर्ज कराते हुए मामले की जांच की मांग कलेक्टर के सामने रखी थी।

0 कमेटी की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

मामले में जब तीन सदस्यों की कमेटी के द्वारा स्कूल पहुंच कर जांच की गई तो कई ऐसे तथ्य निकलकर सामने आए। जो इस बात की ओर इशारा करते हैं कि कई घटनाएं बाकायदा सोची समझी साजिश के तहत न केवल करवाई गई बल्कि उसको रोकने का भी प्रयास नहीं किया गया । शिक्षकों का जांच समिति के सामने कहना था कि प्रभारी प्राचार्य द्वारा छात्र नेताओं को गलत जानकारी देकर भ्रमित किया गया और कुछ शिक्षकों के विरुद्ध जानबूझकर गलत आंकड़े पेश किए गए। उनकी छवि खराब करने की कोशिश की गई। शिक्षकों ने अपने पत्र में भी इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया है कि उन्हें छात्र नेताओं से कहीं कोई गिला शिकवा नहीं है क्योंकि उन्हें जैसा प्रभारी प्राचार्य के द्वारा दिखाया गया वैसा ही भ्रम उनके मन में उत्पन्न हुआ और समस्त वस्तु स्थिति को जानते हुए भी प्रभारी प्राचार्य द्वारा शिक्षकों को साजिश रचकर बदनाम करवाने की कोशिश की गई।

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0 सीसीटीवी कैमरे की रिकार्डिंग हो गया डिलीट

इसमें सबसे बड़ा विषय स्कूल में मौजूद सीसीटीवी कैमरे का फुटेज था। सेजेस बालक सरकंडा 32 सीसीटीवी कैमरा से लैस स्कूल है जिसका नियंत्रण प्राचार्य कक्ष से ही होता है। घटना के बाद एक शिक्षिका ने लिखित में प्रभारी प्राचार्य से यह निवेदन किया था की सीसीटीवी कैमरे का फुटेज उन्हें अवलोकन हेतु दिखाया जाए साथ ही उसे सुरक्षित करके भी रखा जाए। लेकिन प्रभारी प्राचार्य द्वारा ऐसा नहीं किया गया। 7 दिनों के स्टोरेज वाले फुटेज को जानबूझकर डिलीट होने दिया गया। जांच समिति के सामने भी उन्होंने कैमरा बंद होने और फुटेज न होने की बात कही लेकिन जांच समिति ने सीसीटीवी फुटेज के एक्सपर्ट को बुलाकर जब कैमरा चालू करवाया तो कैमरे चालू थे और बाकायदा रिकॉर्डिंग हो रही थी। स्टोरेज 7 दिन के क्षमता का होने के कारण घटना दिनांक का फुटेज ऑटोमेटिक डिलीट हो गया था जिसके कारण साक्ष्य जांच समिति को तो नहीं मिल पाया।

0 प्रताउ़ना का लगाया आरोप

स्कूल की ही एक महिला शिक्षक और पुरुष शिक्षक ने जांच से पहले ही कलेक्टर, एसपी और जिला शिक्षा अधिकारी को प्रभारी प्राचार्य के खिलाफ अपना लिखित आवेदन सौंपा है। जातिगत दुर्भावना से व्यवहार करने, मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और जानबूझकर वीडियो तैयार कर वायरल करवाने का आरोप लगाया गया था।

0 शिक्षक का हो रहा डायलिसिस और बता दिया कक्षा में नहीं पढ़ाते

  • जांच के दौरान दोनों शिक्षकों ने जांच समिति को इस बारे में मौखिक रूप से भी बताया और लिखित रूप में भी इसकी शिकायत की । जिन शिक्षकों का नाम वीडियो में न पढ़ाने वाले शिक्षक के रूप में वायरल किया गया था उसमें से एक शिक्षक 70% दिव्यांग है और साथ ही विगत 7 सालों से डायलिसिस के सहारे जिंदा है। जिसका डायलिसिस सप्ताह में तीन दिन होता है। शासकीय नियमानुसार शिक्षक चाहे तो उसे घर बैठकर भी पूरा वेतन प्राप्त हो सकता है। बावजूद इसके शिक्षक लगातार स्कूल में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन शिक्षा से कर रहा है और वीडियो में चुनिंदा बच्चों से उसी का नाम बोलवाया गया था जिसके बाद जांच के दौरान उसने अपने डेली डायरी को भी प्रस्तुत किया जिसे नियमित प्राचार्य के साथ-साथ स्वयं प्रभारी प्राचार्य ने भी सर्टिफाइड किया है । दो अन्य शिक्षकों ने भी प्रभारी प्राचार्य के व्यवहार को लेकर लिखित शिकायत की है।
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