जेके फाउंडेशन प्रस्तुत करता है मिस्टर, मिस और मिसेज जेके यूनिवर्स इंटरनेशनल 2025 – सीजन 2: थाईलैंड में भारतीय प्रतिभा का परचम

जांजगीर चांपा: जेके फाउंडेशन द्वारा आयोजित विश्व स्तरीय सौंदर्य प्रतियोगिता और रनवे शो “मिस्टर, मिस और मिसेज जेके यूनिवर्स इंटरनेशनल 2025” का दूसरा सीजन थाईलैंड में संपन्न हुआ। यह भव्य आयोजन ग्लैमर और टैलेंट का अद्भुत संगम साबित हुआ। इस प्रतियोगिता में दुनिया भर से आए प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और आकर्षण का प्रदर्शन करते हुए दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।

इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में मिसेज यूनिवर्स का खिताब जीतकर भारत की यशु सोनी ने देश का नाम गर्व से ऊंचा कर दिया। जांजगीर, छत्तीसगढ़ की यशु सोनी सहेली ब्यूटी सैलून और अकादमी की संचालिका हैं। उन्होंने अपनी प्रतिभा और उत्कृष्ट प्रस्तुति से न केवल जजों का दिल जीता, बल्कि दर्शकों का भी भरपूर समर्थन हासिल किया। उनका आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और सामाजिक जागरूकता का दृष्टिकोण मिसेज यूनिवर्स के खिताब के लिए निर्णायक साबित हुआ। इस सीजन में प्रतियोगिता का स्तर और भव्यता पहले से भी ज्यादा ऊंचा था। जेके फाउंडेशन ने इसे न केवल एक सौंदर्य प्रतियोगिता तक सीमित रखा, बल्कि इसे एक ऐसा मंच बनाया, जहां प्रतिभागी अपनी अद्वितीय प्रतिभाओं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और सामाजिक संदेशों को साझा कर सके। प्रतियोगिता के विभिन्न राउंड में प्रतिभागियों ने अपने मॉडलिंग कौशल, फैशन सेंस, प्रश्नोत्तर राउंड में बुद्धिमत्ता और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति अपनी सोच का प्रदर्शन किया।थाईलैंड का मनमोहक वातावरण और वहां की सांस्कृतिक विविधता इस आयोजन के लिए उपयुक्त मंच साबित हुई। पूरे शो को बेहतरीन तरीके से प्रस्तुत किया गया, जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर के जज, मीडिया और फैशन इंडस्ट्री के बड़े नाम उपस्थित रहे। प्रतियोगिता में ग्लैमर और फैशन का अद्भुत संगम देखने को मिला। रनवे शो में प्रतिभागियों ने विश्व स्तरीय डिजाइनरों के परिधानों को पेश किया, जो इस आयोजन को और भी खास बना गया। यशु सोनी का यह सफर सहेली ब्यूटी सैलून और अकादमी के बिना अधूरा है। जांजगीर स्थित इस अकादमी ने न केवल यशु को उनके सपनों को साकार करने में मदद की, बल्कि अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने और अपने करियर में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। यशु सोनी ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मेहनत, समर्पण और सहेली ब्यूटी सैलून को दिया। यशु सोनी की यह जीत केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण का भी प्रतीक है। एक छोटे से शहर की महिला ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी जगह बनाई, जिससे यह साबित होता है कि मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ कोई भी सपना साकार हो सकता है। उनकी यह यात्रा देश की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

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