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क्या रात होते ही बंद हो जाती है सरकारी सेहत व्यवस्था? खून से लथपथ घायल, ताले लगे अस्पताल और जवाबदेह अफसर गायब

खोंगसरा स्वास्थ्य विभाग का अस्पताल ताले में बंद मिला — सवाल सिर्फ लापरवाही का नहीं, जवाबदेही से भागने का है

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CG Health System:–कोटा विकासखंड के अंतर्गत ग्राम खोंगसरा में दो वाहनों की टक्कर होती है। एक युवक गंभीर रूप से घायल हो जाता है। सड़क पर पड़ा युवक खून से लथपथ तड़पता रहता है। गांव के लोग इंसानियत दिखाते हैं, उसे उठाते हैं और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आमागोहन की ओर भागते हैं। उन्हें लगता है कि अस्पताल है, इलाज मिलेगा, जान बचेगी। लेकिन अस्पताल पहुंचते ही उम्मीद दरवाजे के बाहर दम तोड़ देती है। मुख्य गेट पर ताला लटका है। अस्पताल है, लेकिन नहीं है।

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घटना की सूचना मिलते ही नवनियुक्त बेलगहना ब्लॉक अध्यक्ष अश्वनी उदेश्य अपने साथियों आशीष मिश्रा, शिवा सिंह और अन्य कार्यकर्ताओं के साथ अस्पताल पहुंचते हैं। सामने वही दृश्य — बंद अस्पताल, सन्नाटा और ताला।
अश्वनी उदेश्य कहते हैं – यह कोई लापरवाही नहीं है, यह सिस्टम का चरित्र है।

वह बताते हैं कि अस्पताल बंद मिलने पर उन्होंने कर्मचारियों और कोटा खंड चिकित्सा अधिकारी को फोन किया। लेकिन फोन उठाना भी सिस्टम ने जरूरी नहीं समझा।
सवाल उठता है —
जब एक युवक की जान जा रही थी, तब खंड चिकित्सा अधिकारी कहां थे? और जब फोन किया गया, तब चुप्पी क्यों थी?

किसी ने जवाब नहीं दिया। न सिस्टम ने, न अफसर ने।
मजबूरी में घायल युवक को वाहन बुक कर बिलासपुर अस्पताल भेजा गया। रास्ते में अगर कुछ हो जाता, तो क्या यह कहा जाता कि “दुर्भाग्य था”?

ब्लॉक अध्यक्ष बताते हैं कि खोंगसरा से पेंड्रा रोड तक का इलाका दुर्घटना संभावित है। मोड़ ज्यादा हैं, हादसे होते रहते हैं। ऐसे इलाके में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का बंद रहना यह बताता है कि स्वास्थ्य व्यवस्था योजना नहीं, सिर्फ घोषणा है।

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वह सवाल करते हैं —  आपात स्थिति में स्टाफ गायब है और ऊपर से फोन तक नहीं उठाया जाता। फिर सरकार किस आधार पर कहती है कि स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हुई हैं?

फिलहाल घायल युवक का इलाज बिलासपुर में जारी है।
लेकिन सवाल अब सिर्फ एक युवक का नहीं है।
सवाल यह है —
क्या सरकारी अस्पताल सिर्फ उद्घाटन की तस्वीरों के लिए हैं?
क्या सिस्टम तब ही जागेगा, जब किसी की मौत हो जाएगी?
और सबसे बड़ा सवाल —
अगर अस्पताल पर ताला लगा है, तो आम आदमी अपनी जान लेकर आखिर जाए तो जाए कहां?

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