छत्तीसगढ़ में चला BJP प्रभारी स्मृति ईरानी का ‘हंटर’ ! पांच मिनट में खाली कराया BJP दफ्तर, दिल्ली से लाई रिपोर्ट में नेताओं के दौरों का पूरा हिसाब
रायपुर पहुंचते ही बदला बैठक का माहौल ! किसने कितने दौरे किए, कौन रहा पीछे — प्रदेश प्रभारी की समीक्षा से संगठन में हलचल

रायपुर | प्रखरभूमि न्यूज नेटवर्क
रायपुर : छत्तीसगढ़ भाजपा की नई प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी के रायपुर दौरे ने पार्टी के भीतर संगठनात्मक अनुशासन और नेताओं की सक्रियता को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। प्रदेश भाजपा मुख्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर पहुंचने के बाद स्मृति ईरानी ने ऐसा निर्देश दिया कि महज पांच मिनट के भीतर कार्यालय परिसर से गैर-जरूरी लोगों को बाहर जाना पड़ा। इसके बाद बैठकों में संगठन के कामकाज और नेताओं के क्षेत्रीय दौरों की समीक्षा का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया।
इस दौरे की सबसे चर्चित बात यह रही कि स्मृति ईरानी केवल औपचारिक मुलाकातों तक सीमित नहीं रहीं। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने नेताओं की जमीनी सक्रियता से जुड़ी जानकारी के आधार पर समीक्षा की। किन नेताओं ने अपने निर्धारित दौरे पूरे किए और कौन अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा पाया, इस पर बैठक में चर्चा हुई। इससे संगठन के भीतर जवाबदेही को लेकर हलचल बढ़ने की बात कही जा रही है।
पांच मिनट में खाली हुआ भाजपा कार्यालय !
माना एयरपोर्ट से प्रदेश भाजपा मुख्यालय पहुंचने के बाद स्वागत की औपचारिकताएं पूरी की गईं। इसके बाद स्मृति ईरानी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि बैठक के लिए जिन नेताओं की जरूरत है, केवल वही कार्यालय में रुकें। बाकी लोगों से रवाना होने को कहा गया। जरूरत पड़ने पर संबंधित नेताओं को बाद में बुलाने की बात भी कही गई।
बताया जा रहा है कि परिसर में सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस बल को लेकर भी उन्होंने अपनी जरूरत स्पष्ट की। इस घटनाक्रम को प्रदेश प्रभारी की कार्यशैली और बैठकों को सीमित तथा उद्देश्यपरक रखने के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
परिचय कराने की कोशिश पर दोटूक जवाब
प्रदेश कार्यालय में स्वागत और मुलाकात के दौरान एक पदाधिकारी ने दूसरे नेता का परिचय कराने की कोशिश की। सूत्रों के मुताबिक़ स्मृति ईरानी ने इसकी आवश्यकता नहीं बताते हुए कहा कि वह नेताओं को जानती हैं और स्वयं सभी का परिचय प्राप्त कर लेंगी।
इस प्रसंग ने भी ध्यान खींचा, क्योंकि इससे बैठक में अनावश्यक औपचारिकताओं के बजाय सीधे कामकाज पर ध्यान देने का संदेश सामने आया। हालांकि, इस बातचीत का स्वतंत्र आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं हुआ है।
‘मन की बात’ सुनने के लिए बूथ तक जाने का निर्देश
रिपोर्ट के मुताबिक, बैठकों के औपचारिक दौर से पहले स्मृति ईरानी ने नेताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ को बूथ स्तर तक सुनने और कार्यकर्ताओं से जुड़ने का निर्देश दिया। उन्होंने स्वयं भी प्रदेश भाजपा मुख्यालय में बैठकर कार्यक्रम सुना। प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव की भी इसमें सहभागिता बताई गई है।
इस संदेश का राजनीतिक महत्व यह है कि पार्टी नेतृत्व संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों से लेकर बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं तक संवाद और वैचारिक जुड़ाव को मजबूत बनाए रखना चाहता है। भाजपा की संगठनात्मक रणनीति में बूथ इकाई की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है।
दिल्ली से होमवर्क करके पहुंचीं प्रभारी ! दौरों की रिपोर्ट पर चर्चा
इस दौरे का सबसे अहम पहलू नेताओं के क्षेत्रीय दौरों और जमीनी सक्रियता की समीक्षा बताया जा रहा है। NPG की रिपोर्ट के अनुसार, स्मृति ईरानी बैठकों में उन नेताओं के कामकाज का ब्योरा लेकर पहुंची थीं, जिन्होंने अपने निर्धारित दौरे किए थे या अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई थी। बैठक में बेहतर प्रदर्शन करने वाले नेताओं की सराहना और कमजोर प्रदर्शन करने वालों की जवाबदेही पर चर्चा किए जाने की बात कही गई है।
इस घटनाक्रम से संगठन में यह संदेश जाता दिखाई दिया कि जिम्मेदारी संभालने वाले पदाधिकारियों की सक्रियता का आकलन महत्वपूर्ण है। केवल कागजी रिपोर्ट के आधार पर संगठनात्मक कामकाज का आकलन करने के बजाय क्षेत्र में मौजूदगी और कार्यकर्ताओं से संपर्क पर जोर दिए जाने की चर्चा है। हालांकि, रिपोर्ट में उल्लिखित व्यक्तिगत आकलन का पूरा आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं है।
सुस्त जिला अध्यक्षों को सुधार का मौका
अंदरखाने की ख़बर माने तो इस दौरान कुछ जिलों के अध्यक्षों के कामकाज को अपेक्षा के अनुरूप नहीं माना गया। ऐसे मामलों में तत्काल बड़ी कार्रवाई के बजाय संबंधित पदाधिकारियों को काम में तेजी लाने और संगठनात्मक सक्रियता सुधारने का अवसर दिए जाने की बात सामने आई। प्रदेश पदाधिकारियों को भी जिला इकाइयों के कामकाज में सुधार के लिए जिम्मेदारी सौंपे जाने का उल्लेख है।
जिला अध्यक्षों की भूमिका इसलिए भी अहम है, क्योंकि बूथ और मंडल स्तर पर पार्टी के कार्यक्रमों को लागू करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने और स्थानीय मुद्दों पर जनसंपर्क बनाए रखने की जिम्मेदारी उन्हीं पर रहती है। अब सवाल यह है कि समीक्षा के बाद कमजोर मानी गई इकाइयों के कामकाज में कितनी तेजी आती है।
किरण सिंह देव और कर्मवीर सिंह के साथ अलग चर्चा
रिपोर्ट के अनुसार, बैठकों के बीच स्मृति ईरानी ने प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव और प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह के साथ अलग से चर्चा की। यह बातचीत कार्यालय परिसर में भोजन के दौरान हुई बताई गई है। राजनीतिक दृष्टि से प्रदेश प्रभारी और संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों के बीच इस तरह की चर्चा को संगठनात्मक फीडबैक और आगे की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
हालांकि, इस बातचीत में किन विशिष्ट मुद्दों पर चर्चा हुई, इसका विस्तृत आधिकारिक ब्यौरा सामने नहीं आया है। इसलिए इसे किसी संभावित संगठनात्मक बदलाव या कार्रवाई से जोड़कर देखना फिलहाल जल्दबाजी होगी।
अब नेताओं के कामकाज पर रहेगी नजर
स्मृति ईरानी के रायपुर दौरे से जुड़ी रिपोर्ट में सबसे बड़ा संदेश संगठनात्मक अनुशासन, क्षेत्रीय सक्रियता और जवाबदेही का उभरता है। बैठकों में दौरों की समीक्षा, जिला इकाइयों के कामकाज और बूथ स्तर तक पहुंचने पर जोर दिए जाने की बात सामने आई है। इससे प्रदेश भाजपा के नेताओं के सामने अपने क्षेत्रों में सक्रियता प्रदर्शित करने की चुनौती बढ़ सकती है।

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