कोरबा निगम की MIC में बड़ा विस्तार, 5 नए चेहरों को मिली जिम्मेदारी

महापौर संजूदेवी राजपूत ने बढ़ाया परिषद का दायरा, अब 14 सदस्य संभालेंगे विभागों की कमान
कोरबा। नगर पालिक निगम कोरबा की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव हुआ है। महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत ने मेयर इन काउंसिल (MIC) का विस्तार करते हुए 5 नए सदस्यों को विभागीय जिम्मेदारी सौंपी है। इस विस्तार के साथ MIC में प्रभारी सदस्यों की संख्या 9 से बढ़कर 14 हो गई है।
महापौर के इस फैसले को निगम की कार्यप्रणाली को और अधिक व्यापक बनाने तथा विभागीय जिम्मेदारियों के बेहतर वितरण के रूप में देखा जा रहा है। नए विस्तार के बाद निगम के अलग-अलग विभागों की निगरानी और कामकाज की जिम्मेदारी अब अधिक सदस्यों के बीच विभाजित होगी।
इन नए चेहरों को मिली अहम जिम्मेदारी
जारी आदेश के अनुसार अशोक चावलानी को सामान्य प्रशासन एवं विधायी कार्य तथा नगरीय नियोजन, नरेन्द्र देवांगन को वित्त, लेखा एवं अंकेक्षण तथा राजस्व, श्रीमती चन्द्रकली जायसवाल को खाद्य, किशनलाल केंवट को शिक्षा, खेल एवं युवा कल्याण तथा प्रेमकुमार साहू को यांत्रिकी एवं सामाजिक कल्याण विभाग का प्रभारी सदस्य बनाया गया है।
14 सदस्यों के हाथों में विभागों की कमान
विस्तारित MIC में हितानंद अग्रवाल को लोक कर्म, भानुमति जायसवाल को पर्यावरण, अजय गोंड़ को संस्कृति एवं पर्यटन, फिरतराम साहू को जल कार्य, धनकुमारी गर्ग को मनोरंजन एवं विरासत संरक्षण, उर्वशी राठौर को महिला एवं बाल विकास, ममता यादव को गरीब उपशमन, अजय कुमार चन्द्रा को अग्निशमन एवं विद्युत संधारण तथा सरोज शांडिल्य को उद्यानिकी विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
विभागीय निगरानी से लेकर विकास कार्यों तक बढ़ेगी सक्रियता
MIC के विस्तार के बाद अब 14 प्रभारी सदस्य अपने-अपने विभागों से जुड़े कार्यों की निगरानी करेंगे। इससे नगर निगम के विकास कार्यों, विभागीय योजनाओं और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मामलों में MIC की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।
महापौर के इस निर्णय से निगम की सत्ता व्यवस्था में सहभागिता का दायरा बढ़ा है। अलग-अलग सदस्यों को महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिलने के बाद आने वाले समय में नगर निगम की बैठकों, विकास कार्यों और विभागीय फैसलों में राजनीतिक एवं प्रशासनिक सक्रियता बढ़ने के संकेत हैं।
अब जिम्मेदारी के साथ जवाबदेही भी
MIC के विस्तार के साथ विभागीय जिम्मेदारियां तो बढ़ी ही हैं, साथ ही संबंधित सदस्यों के सामने अपने-अपने विभागों के कामकाज को गति देने और नागरिकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की चुनौती भी होगी। अब देखना होगा कि नई जिम्मेदारियों के साथ निगम की कार्यप्रणाली में कितना बदलाव आता है और शहर के विकास कार्यों को इसका कितना लाभ मिलता है।

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