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कोरबा: गौरव पथ और आरसीसी नाला टेंडर में अपारदर्शिता का आरोप, ठेकेदारों ने कलेक्टर से की शिकायत, निगम आयुक्त को अंतिम नोटिस

कोरबा। नगर पालिक निगम कोरबा की करोड़ों रुपये की दो महत्वपूर्ण निविदाओं (टेंडर्स) को लेकर विवाद गहरा गया है। टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने वाले ठेकेदारों ने नगर निगम प्रशासन पर बिना कोई कारण बताए उनकी निविदाएं निरस्त करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले में ठेकेदारों ने कलेक्टर को शिकायत भेजकर गुहार लगाई है, वहीं नगर निगम आयुक्त को अंतिम पत्र लिखकर बिड रिजेक्ट किए जाने के कारणों की जानकारी मांगी है।

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बिना कारण बताए दो बड़ी निविदाएं खारिज करने का आरोप

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ठेकेदारों ने कलेक्टर को सौंपे गए विस्तृत आवेदन में बताया कि उनकी फर्म ने नगर निगम द्वारा जारी गौरव पथ फोर लेन बी.टी. रोड निर्माण कार्य (टेंडर सिस्टम नंबर 188571, द्वितीय कॉल) तथा बाल्को कूलिंग टावर से ढेंगुरनाला तक आरसीसी नाला निर्माण कार्य (टेंडर सिस्टम नंबर 187511) में हिस्सा लिया था। लेकिन दोनों ही महत्वपूर्ण निविदाओं को बिना किसी पूर्व सूचना, स्पष्टीकरण या कारण बताए अचानक निरस्त कर दिया गया।

दो बार पत्राचार के बाद भी नहीं मिला जवाब

आवेदकों के अनुसार, उन्होंने 2 जून और 3 जून 2026 को निगम आयुक्त को अलग-अलग पत्र लिखकर बिड की स्थिति तथा निरस्तीकरण के कारणों की जानकारी मांगी थी। इसके बावजूद निगम प्रशासन की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। ठेकेदारों का कहना है कि ई-टेंडरिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन होना चाहिए और किसी भी बोलीदाता की निविदा खारिज करने पर उसका कारण बताना विभाग का दायित्व है।

फाइनेंशियल बिड खुलने के बाद भी जानकारी छिपे होने का दावा

शिकायत में एक और गंभीर मुद्दा उठाया गया है। ठेकेदारों का दावा है कि गौरव पथ फोर लेन सड़क निर्माण कार्य की फाइनेंशियल बिड खुलने के बाद भी ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर योग्य बोलीदाताओं तथा एल-1 (L-1) ठेकेदार की जानकारी प्रदर्शित नहीं हो रही है। आमतौर पर वित्तीय निविदा खुलने के बाद यह जानकारी सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध हो जाती है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं होने से प्रक्रिया की निष्पक्षता पर संदेह पैदा हो रहा है।

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चहेते ठेकेदार को लाभ पहुंचाने का आरोप और निष्पक्ष जांच की मांग

ठेकेदारों ने आरोप लगाया है कि अपने किसी चहेते ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए उसके टेंडर प्रपत्र में दर्ज गंभीर गलतियों को भी नजरअंदाज कर दिया गया है, जो कि असल में उसकी निविदा निरस्त करने का ठोस कारण हो सकता था। ठेकेदारों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, टेंडर मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और उनकी निविदाओं को गैर-उत्तरदायी (Non-Responsive) घोषित करने का आधार बताने की मांग की है।

निगम आयुक्त को कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

निगम आयुक्त को भेजे गए ताजा पत्र में ठेकेदारों ने इसे स्पष्टीकरण के लिए “अंतिम अनुरोध” बताया है। पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द ही इस संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो वे कानूनी उपाय अपनाने के साथ ही मामले को उच्च सक्षम अधिकारियों के समक्ष उठाने के लिए बाध्य होंगे।

ठेकेदारों द्वारा उठाए गए प्रमुख सवाल:

दो बड़ी निविदाओं को किस आधार पर रिजेक्ट किया गया?

रिजेक्शन से पहले ठेकेदारों को कोई सूचना या स्पष्टीकरण क्यों नहीं दिया गया?

फाइनेंशियल बिड खुलने के बाद भी एल-1 और योग्य बोलीदाताओं की जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर क्यों नहीं दिखाई गई?

क्या टेंडर मूल्यांकन की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संपन्न हुई है?

बार-बार पत्राचार किए जाने के बावजूद निगम प्रशासन इस मामले पर मौन क्यों साधे हुए है?

अब इस मामले में नगर निगम प्रशासन और जिला प्रशासन की प्रतिक्रिया पर सबकी निगाहें टिकी हैं। यदि शिकायत में उठाए गए बिंदुओं की जांच होती है, तो यह टेंडर प्रक्रिया में जवाबदेही को लेकर एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।

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प्रखर भूमि

प्रखरभूमि एक RNI में पंजीकृत साप्ताहिक समाचार पत्र है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2013 में हुई। अब इसका डिजिटल संस्करण भी इस वेबसाइट के माध्यम से पाठकों तक उपलब्ध है, जहां छत्तीसगढ़ सहित देश-दुनिया की महत्वपूर्ण और विश्वसनीय खबरें प्रकाशित की जाती हैं।

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