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KORBA: HTPP में RTI पर उठे सवाल, जानकारी न देने पर विभाग घिरा

  • कोरबा। सूचना का अधिकार (RTI) कानून पारदर्शिता सुनिश्चित करने का अहम माध्यम माना जाता है, लेकिन कोरबा के विद्युत गृह HTPP में इसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। दर्री पश्चिम स्थित 1×500 मेगावाट परियोजना के सिविल अनुभाग में एक पत्रकार द्वारा मांगी गई जानकारी अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर संदेह गहराने लगा है।
  • जानकारी के अनुसार, आवेदक पत्रकार जितेंद्र कुमार साहू ने विभाग के निर्देशानुसार 128 पन्नों की जानकारी के लिए 256 रुपए का पोस्टल ऑर्डर जमा किया था। इसके बावजूद कई महीने बीत जाने के बाद भी उन्हें संबंधित जानकारी नहीं दी गई है।
  • मामले में यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि विभाग द्वारा किसी ठेकेदार से जुड़े कथित अनियमितताओं को छिपाने के लिए सूचना रोकी जा रही है। नियमों के तहत शुल्क जमा होने के बाद निर्धारित समयसीमा में जानकारी उपलब्ध कराना अनिवार्य होता है, लेकिन यहां ऐसा नहीं किया गया।
  • आवेदक ने इस मामले में प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपील दायर कर दी है। RTI अधिनियम की धारा 19(1) के तहत अब संबंधित अधिकारियों को जवाब देना होगा कि तय समय में जानकारी क्यों उपलब्ध नहीं कराई गई।
  • इस पूरे प्रकरण ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या RTI कानून का पालन हो रहा है? क्या जन सूचना अधिकारी नियमों से ऊपर हैं? और यदि जल्द ही जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई, तो मामला राज्य सूचना आयोग तक पहुंच सकता है।
  • अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले में पारदर्शी जांच कर सच्चाई सामने लाता है या नहीं।
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प्रखर भूमि

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