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कोरबा: वन विभाग की कार्रवाई पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने किया विरोध प्रदर्शन

कोरबा। वन विभाग की एक हालिया कार्रवाई को लेकर विभाग की कार्यप्रणाली और मंशा पर सवाल खड़े हो गए हैं। सतरेंगा क्षेत्र में छापेमारी कर वन अमले ने छह घरों से 359 नग चिरान (लकड़ी) जब्त करते हुए वन अधिनियम के तहत कार्रवाई की, लेकिन इस कार्रवाई के बाद विवाद गहराता नजर आ रहा है।

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मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया जब सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण कोरबा स्थित डीएफओ कार्यालय पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वन विभाग की टीम ने उनके घरों में परिवार की गैरमौजूदगी में ताले तोड़कर तलाशी ली और वर्षों पुरानी लकड़ी को जब्त कर लिया। उन्होंने जब्त लकड़ी वापस करने की मांग की। हालांकि, विभाग द्वारा जांच का आश्वासन दिए जाने के बाद ग्रामीण लौट गए।

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जानकारी के अनुसार, डीएफओ प्रेमलता यादव को बालको वन परिक्षेत्र के सतरेंगा में अवैध वनोपज भंडारण की सूचना मिली थी। उनके निर्देश पर वन विभाग की टीम सर्च वारंट के साथ गुरुवार सुबह सतरेंगा पहुंची। टीम ने शिक्षक जगतराम निर्मलकर सहित अन्य ग्रामीणों के घरों में तलाशी ली और साल, बीजा, हल्दू समेत विभिन्न प्रजातियों की कुल 359 नग चिरान जब्त की।

ग्रामीणों का कहना है कि कार्रवाई के दौरान कई घरों में कोई मौजूद नहीं था, बावजूद इसके ताले तोड़े गए। कुछ लोगों ने दबाव में पंचनामा पर हस्ताक्षर करने का आरोप भी लगाया। संबंधित शिक्षक ने बताया कि जब्त की गई लकड़ी उनके पिता द्वारा वर्षों पहले मकान निर्माण के लिए तैयार कराई गई थी।

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ग्रामीणों ने डीएफओ को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और जब्त लकड़ी लौटाने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर समाधान नहीं हुआ, तो सतरेंगा रेस्ट हाउस मार्ग पर चक्काजाम किया जाएगा।

सूचना लीक होने का आरोप

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि वन विभाग की कार्रवाई की जानकारी पहले ही लीक हो गई थी, जिससे अवैध कटाई में शामिल लोग सतर्क होकर लकड़ी हटा ले गए। उनका दावा है कि विभाग के भीतर से ही सूचना बाहर पहुंची, जिसके कारण वास्तविक आरोपी बच निकले।

वन कर्मियों की भूमिका पर सवाल

ग्रामीणों ने वन कर्मियों पर अपनी जिम्मेदारियों के प्रति लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि जंगल की सुरक्षा की जिम्मेदारी वन विभाग की है, लेकिन इसे वन प्रबंधन समिति पर छोड़ दिया गया है। आरोप है कि वनकर्मी क्षेत्र में कम सक्रिय रहते हैं और केवल औपचारिक दौरा कर लौट जाते हैं।

फिलहाल, वन विभाग ने पूरे मामले की जांच का आश्वासन दिया है। अब देखना होगा कि जांच में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं।

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प्रखर भूमि

प्रखरभूमि एक RNI में पंजीकृत साप्ताहिक समाचार पत्र है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2013 में हुई। अब इसका डिजिटल संस्करण भी इस वेबसाइट के माध्यम से पाठकों तक उपलब्ध है, जहां छत्तीसगढ़ सहित देश-दुनिया की महत्वपूर्ण और विश्वसनीय खबरें प्रकाशित की जाती हैं।

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