युक्तियुक्तकरण का उद्देश्य यह होता है कि स्कूलों में शिक्षकों की संख्या को विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार संतुलित किया जाए। यानी जहाँ बच्चे ज्यादा हैं वहाँ ज्यादा शिक्षक, और जहाँ बच्चे कम हैं वहाँ से अतिरिक्त शिक्षकों को अन्य स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए।
महासमुंद की शिक्षिका की याचिका पर सुनवाई से प्रदेशभर की अनियमितताएं उजागर, कई जिलों के शिक्षक पहुंचे हाईकोर्ट
बिलासपुर/महासमुंद। छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की पदस्थापना प्रक्रिया युक्तियुक्तकरण इन दिनों विवादों में घिर गई है। शिक्षा विभाग द्वारा की जा रही इस प्रक्रिया में भारी अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं।

महासमुंद जिले की एक महिला शिक्षक की ओर से हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इस पर 10 दिन का स्थगन आदेश (स्टे) जारी कर दिया है। यह आदेश एक व्यक्तिगत याचिका पर आधारित है, लेकिन इससे प्रदेश के हजारों शिक्षकों को राहत की संभावनाएं खुलती नज़र आ रही हैं।
???? युक्तियुक्तकरण क्या है?
युक्तियुक्तकरण का उद्देश्य यह होता है कि स्कूलों में शिक्षकों की संख्या को विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार संतुलित किया जाए। यानी जहाँ बच्चे ज्यादा हैं वहाँ ज्यादा शिक्षक, और जहाँ बच्चे कम हैं वहाँ से अतिरिक्त शिक्षकों को अन्य स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए।
परंतु, शिक्षकों का आरोप है कि इस प्रक्रिया को राजनीतिक, व्यक्तिगत और पक्षपातपूर्ण तरीके से संचालित किया जा रहा है। परिणामस्वरूप, न सिर्फ नियमों की अनदेखी की जा रही है, बल्कि शिक्षकों के साथ अन्याय भी हो रहा है।
⚖️ हाईकोर्ट में क्या हुआ?
महासमुंद जिले के गवर्नमेंट अभ्यास प्राइमरी स्कूल में कार्यरत शिक्षिका कल्याणी थेकर ने अधिवक्ता अवध त्रिपाठी के माध्यम से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में उन्होंने बताया कि—
उनके स्कूल में 91 छात्र नामांकित हैं।
शासन के नियमानुसार इतनी संख्या पर 1 हेडमास्टर और 4 शिक्षक अनिवार्य हैं।
लेकिन स्कूल की छात्र संख्या गलत तरीके से 88 दर्शाई गई।
इस गलत आंकड़े के आधार पर उन्हें अतिशेष (Surplus) बता दिया गया।
फिर उनका नाम युक्तियुक्तकरण सूची में डालकर दूरस्थ विद्यालय में पदस्थ कर दिया गया।
शासन की ओर से अदालत में यह स्वीकार किया गया कि छात्र संख्या दर्ज करने में त्रुटि हुई है। कोर्ट ने इस आधार पर स्पष्ट कहा कि—
“बिना दावा-आपत्ति के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया शुरू करना असंवैधानिक है।”
नतीजतन, कोर्ट ने शिक्षिका के मामले में 10 दिन की रोक लगाई है और शासन से स्पष्टीकरण मांगा है।
???? क्या यह सिर्फ एक मामला है?
नहीं, महासमुंद की यह घटना तो महज़ शुरुआत है। दरअसल, प्रदेश के लगभग हर जिले से इस तरह की गड़बड़ियों की खबरें आ रही हैं।
शिक्षकों का कहना है कि—
उन्हें बिना सूचना के ही अतिशेष घोषित कर दिया गया,
दावा-आपत्ति नहीं ली गई,
मनमाने तरीके से पदस्थापन आदेश थमा दिया गया,
कुछ मामलों में जानबूझकर आंकड़े बदल दिए गए,
कई शिक्षकों को अपनी घरेलू स्थिति, स्वास्थ्य, या वरिष्ठता के बावजूद दूर-दराज के स्कूलों में भेज दिया गया।
???? किन जिलों से याचिकाएं आईं?
इस समय युक्तियुक्तकरण के विरुद्ध छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अलग–अलग जिलों के कई शिक्षक याचिकाएं दायर कर चुके हैं। इनमें प्रमुखतः निम्न जिलों के मामले सामने आए है
दुर्ग रायपुर महासमुंद बिलासपुर कोरबा राजनांदगांव जांजगीर चांपा
इन सभी जिलों में शिक्षक संघों द्वारा युक्तियुक्तकरण की पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए हैं।
????️ शिक्षक क्या कह रहे हैं?
एक वरिष्ठ शिक्षक नेता ने बताया—
“युक्तियुक्तकरण का उद्देश्य शिक्षकों की संतुलित नियुक्ति है, न कि प्रताड़ना। लेकिन कुछ अफसर इसे शिक्षकों को मानसिक दबाव में लाने और अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने का जरिया बना चुके हैं।”
शिक्षकों की मांग है कि—
जिले स्तर पर ओपन काउंसलिंग हो,
दावा–आपत्ति की समयसीमा दी जाए,स्थानांतरण से पहले प्रभावित शिक्षक से चर्चा की जाए,और पूरे प्रक्रिया की मॉनिटरिंग राज्य स्तर पर हो।
???? शासन की मुश्किलें बढ़ीं
हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना शुरू हो गया है। यदि अन्य याचिकाओं में भी शासन की गलतियां उजागर होती हैं तो न केवल युक्तियुक्तकरण की पूरी प्रक्रिया पर सर्वोच्च रोक लग सकती है, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों पर जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग भी तेज हो सकती है।

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