
छत्तीसगढ़ की राजनीति में नियुक्तियों को लेकर अक्सर घमासान मचता है, लेकिन कटघोरा से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने संगठन की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। अनुराग दहलानी को मंडल अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद अब उनकी उम्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

36 की उम्र में ‘नियम विरुद्ध’ ताजपोशी?
सूत्रों के अनुसार, संगठन में मंडल अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए एक निश्चित आयु सीमा (अक्सर 35 वर्ष के भीतर) का मापदंड तय होता है, ताकि ऊर्जावान और युवा चेहरों को मौका मिले। आरोप है कि अनुराग दहलानी को 36 साल की उम्र पार करने के बावजूद यह पद दे दिया गया। इस ‘स्पेशल ट्रीटमेंट’ ने उन कार्यकर्ताओं को नाराज कर दिया है जो सालों से नियमों के दायरे में रहकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।
पोल खुलते ही ‘डिजिटल सफाई’ का खेल
जैसे ही अनुराग दहलानी की नियुक्ति की घोषणा हुई, सोशल मीडिया पर उनकी असल उम्र को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई। जानकार बताते हैं कि मामला उजागर होते ही और अपनी फजीहत होते देख अनुराग दहलानी ने एक बड़ा ‘डिजिटल पैंतरा’ चला।
चर्चा का विषय: विवाद से बचने के लिए उन्होंने आनन-फानन में अपने आधिकारिक फेसबुक प्रोफाइल से अपनी ‘जन्म तिथि’ (Date of Birth) ही हटा दी।
उठ रहे हैं ये तीखे सवाल:
पारदर्शिता कहाँ? यदि नियुक्ति नियमों के अनुसार थी, तो सोशल मीडिया से जन्म तिथि हटाने की नौबत क्यों आई? क्या यह तथ्यों को छिपाने की कोशिश नहीं है?
आलाकमान को गुमराह किया? क्या संगठन के शीर्ष नेतृत्व को उम्र के बारे में सही जानकारी दी गई थी या गलत शपथ पत्र/दस्तावेजों के आधार पर यह कुर्सी हासिल की गई?
संगठन में असंतोष: नियमों की इस अनदेखी से कटघोरा के स्थानीय कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि “जब चेहरा ही नियमों को ताक पर रखकर चुना गया है, तो संगठन का अनुशासन कैसे बचेगा?”
अब देखना यह होगा कि क्या संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी इस ‘उम्र विवाद’ पर कोई संज्ञान लेते हैं या फिर तथ्यों को छिपाने के इस खेल पर खामोशी अख्तियार कर ली जाएगी।

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