CG News:– मेडिकल कॉलेज बन रहा है… लेकिन किस कीमत पर?

मेडिकल कॉलेज निर्माण में मजदूरी घोटाला, किसानों की जमीन और रोजगार पर भी संकट

CG News:– एक मेडिकल कॉलेज बन रहा है। कहा जा रहा हैयह विकास है। कहा जा रहा हैइससे इलाज सस्ता होगा, डॉक्टर मिलेंगे, भविष्य सुधरेगा। लेकिन ज़रा ठहरिए
अगर यही मेडिकल कॉलेज मजदूरों की मजदूरी चुरा कर, महिला श्रमिकों की मेहनत को आधे दाम में खरीद कर और किसानों को उनके ही खेतों से दूर कर के बनेतो क्या इसे विकास कहा जाएगा?

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जांजगीरचांपा जिले के ग्राम कुटरा में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज को सरकार द्वारा विकास की बड़ी परियोजना बताया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि इससे क्षेत्र को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी, डॉक्टरों की कमी दूर होगी और इलाज सस्ता होगा।
लेकिन इस तथाकथित विकास की नींव मजदूरों की शोषित मजदूरी और किसानों की बाधित आजीविका पर रखी जा रही है।

Janjgir–Champa : जांजगीर चांपा जिले के ग्राम कुटरा में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज में मजदूरों और महिला श्रमिकों को शासन द्वारा तय दर से कम मजदूरी देने का मामला सामने आया है। यह कोई मामूली भूल नहीं है, बल्कि श्रम कानूनों की अनदेखी का आरोप है। इस पर जिले के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक मोतीलाल देवांगन ने कलेक्टर जांजगीरचांपा को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। वही पूर्व विधायक ने पत्र में बताया कि मेडिकल कॉलेज निर्माण कार्य में लगे महिला श्रमिकों को प्रतिदिन 240 रुपये दिए जा रहे हैं, जबकि शासन द्वारा तय दर 425 रुपये है। इसी तरह राजमिस्त्रियों को 440 रुपये मिल रहे हैं, जबकि निर्धारित दर 640 रुपये है। साफ है कि इस तरह के भुगतान से मजदूरों का जीवन स्तर प्रभावित होता है और उनके हक़ की लगातार अनदेखी हो रही है।

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मोतीलाल देवांगन ने यह भी बताया कि निर्माण कार्य से ग्राम कुटरा के किसानों की कृषि भूमि प्रभावित हो रही है। खेतों तक जाने पर रोक लगाई जा रही है, जिससे किसानों की आजीविका संकट में है। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए वैकल्पिक मार्ग और सड़क निर्माण किया जाना चाहिए।

पूर्व विधायक ने यह भी सुझाव दिया कि जिन किसानों की भूमि पर निर्माण कार्य किया जा रहा है और जिनकी कृषि ही जीवनयापन का मुख्य साधन है, उनके परिवार के योग्य सदस्यों को निर्माण कार्य में रोजगार दिया जाना चाहिए।

मोतीलाल देवांगन ने 18 जनवरी 2026 को स्वयं निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज जाकर महिला मजदूरों और श्रमिकों से जानकारी ली। इसके बाद कलेक्टर से अनुरोध किया गया कि सभी श्रमिकों को शासन द्वारा तय मजदूरी दर का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

मामले की जानकारी छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को भी भेजी गई है। अब सवाल यही है कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी तत्परता दिखाएगा, और मजदूरों तथा किसानों के हक़ों की रक्षा कब तक सुनिश्चित होगी।

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