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Bilaspur HighCourt News :– 18 महीने से ज्यादा जेल… पर ट्रायल शुरू नहीं 7 चालान, 51 आरोपी, 1,111 गवाह—फिर भी सुनवाई अधर में लंबी हिरासत पर हाईकोर्ट की टिप्पणी, अनिल टुटेजा को जमानत

Bilaspur HighCourt News :– कथित शराब घोटाला मामले में 23 माह के करीब न्यायिक हिरासत और ट्रायल शुरू न होने की स्थिति को देखते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा को नियमित जमानत दे दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि राहत केवल लंबी कैद और सुनवाई में देरी के आधार पर दी गई है, मामले के मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है।

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Bilaspur News :–बिलासपुर, 3 मार्च। कथित बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पूर्व वरिष्ठ अधिकारी अनिल टुटेजा को नियमित जमानत प्रदान की है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की एकलपीठ ने पारित आदेश में कहा कि जब ट्रायल के निकट भविष्य में पूरा होने की संभावना नहीं हो और आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हो, तब व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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दूसरी जमानत याचिका को मिली मंजूरी

यह टुटेजा की दूसरी जमानत अर्जी थी। इससे पूर्व याचिका खारिज हो चुकी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जांच की प्रगति को देखते हुए दोबारा आवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी थी। उच्च न्यायालय ने माना कि आरोप पत्र दाखिल होने के बावजूद ट्रायल आगे नहीं बढ़ सका, जो परिस्थितियों में महत्वपूर्ण बदलाव है।

21 अगस्त 2024 से हिरासत में

अदालत ने उल्लेख किया कि आवेदक 21 अगस्त 2024 से इस प्रकरण में न्यायिक हिरासत में है। इससे पहले वह प्रवर्तन निदेशालय की कार्यवाही में भी समान लेनदेन से जुड़े आरोपों में निरुद्ध रहा। कुल मिलाकर उसकी हिरासत अवधि लगभग 23 माह के करीब पहुंच चुकी है।

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7 आरोप पत्र, 51 आरोपी, 1,111 गवाह

मामले में अब तक सात चालान पेश किए जा चुके हैं। अभियोजन ने 51 व्यक्तियों को आरोपी बनाया है और 1,111 गवाहों को प्रस्तुत करने का प्रस्ताव रखा है। दस्तावेजी साक्ष्य हजारों पन्नों में हैं। न्यायालय ने कहा कि इतनी व्यापक सुनवाई में स्वाभाविक रूप से लंबा समय लगेगा। वर्तमान में विशेष न्यायालय ने तो संज्ञान लिया है और ही आरोप तय हुए हैं, क्योंकि अभियोजन स्वीकृति लंबित है।

अनुच्छेद 21 का हवाला

आदेश में कहा गया कि जब संज्ञान और आरोप गठन ही लंबित हों, तब ट्रायल की समयसीमा अनिश्चित हो जाती है। ऐसे में आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के विपरीत होगा।

मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं

उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जमानत केवल लंबी हिरासत और ट्रायल में संभावित विलंब के आधार पर दी गई है। आरोपों के गुणदोष पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है और पूर्व आदेशों की टिप्पणियां अप्रभावित रहेंगी।

अदालत ने 1 लाख रुपये के निजी मुचलके और सममूल्य जमानतदार प्रस्तुत करने पर रिहाई का आदेश दिया है। पासपोर्ट जमा करने, जांच ट्रायल में सहयोग करने, गवाहों को प्रभावित करने और बिना अनुमति देश छोड़ने जैसी शर्तें लागू रहेंगी। शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में अभियोजन को जमानत निरस्तीकरण हेतु आवेदन करने की स्वतंत्रता दी गई है।

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