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Bilaspur Highcourt News:– अवैध संबंध को आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण नहीं माना जा सकता, पति व गर्लफ्रेंड की दोषमुक्ति के खिलाफ अपील खारिज

Bilaspur Highcourt News:– अवैध संबंध को आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण नहीं माना जा सकता, पति व गर्लफ्रेंड की दोषमुक्ति के खिलाफ अपील खारिज

Bilaspur Highcourt News:– अवैध संबंधों के चलते आत्महत्या के एक मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने सत्र न्यायालय द्वारा मृतिका के पति और उसकी महिला मित्र को दोषमुक्त किए जाने के फैसले के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि अवैध संबंध भले ही नैतिक रूप से गलत हों, लेकिन केवल इसी आधार पर आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण का अपराध स्वतः सिद्ध नहीं होता।
Bilaspur | बिलासपुर।
पति के कथित अवैध संबंध से परेशान होकर पत्नी द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले में मृतिका के पति और उसकी गर्लफ्रेंड के खिलाफ आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण की धारा 306 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया था। मामले की सुनवाई के बाद सत्र न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया था। इस निर्णय को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अवैध संबंधों को नैतिक रूप से गलत माना जा सकता है, लेकिन जब तक यह साबित न हो कि इन्हीं कारणों से सीधे तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाया गया, तब तक धारा 306 के तहत अपराध नहीं बनता। अदालत ने इस आधार पर ट्रायल कोर्ट के निर्णय को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी।
यह था मामला:–
अभियोजन पक्ष के अनुसार, कुंती का विवाह वर्ष 2011 में रवि कुमार गायकवाड से हुआ था। संतान न होने, कम दहेज मिलने और अशिक्षित होने को लेकर प्रताड़ना के आरोप लगाए गए थे। साथ ही पति के एक महिला मित्र से अवैध संबंध होने की बात भी सामने आई थी। 4 जून 2017 को कुंती की मृत्यु हो गई, जिसके बाद पति और उसकी महिला मित्र के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया।
सत्र परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष प्रताड़ना या आत्महत्या के लिए उकसावे से जुड़े ठोस और प्रत्यक्ष साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। अदालत ने माना कि आरोप प्रमाणित नहीं हो पाए हैं। इसके चलते महासमुंद सत्र न्यायालय ने 22 जुलाई 2022 को पति और उसकी गर्लफ्रेंड को दोषमुक्त कर दिया था।
दोषमुक्ति के इस फैसले के खिलाफ पीड़ित पक्ष ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई जस्टिस संजय श्याम अग्रवाल की सिंगल बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को धारा 306 आईपीसी के तहत दोषी ठहराने के लिए प्रत्यक्ष उकसावा, गंभीर मानसिक क्रूरता और ठोस साक्ष्यों का होना अनिवार्य है। केवल अवैध संबंध होने मात्र से आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण सिद्ध नहीं होता।
मृतिका ने छोड़ा था सुसाइड नोट:–
हाईकोर्ट के समक्ष मृतिका द्वारा छोड़ा गया डायरी नोट भी प्रस्तुत किया गया। अदालत ने कहा कि नोट से यह स्पष्ट होता है कि मृतिका अपने पति से प्रेम करती थी और उसकी महिला मित्र से नाराज थी, लेकिन कहीं भी आत्महत्या के लिए उकसावे या प्रत्यक्ष प्रताड़ना का उल्लेख नहीं मिलता।
हाईकोर्ट ने दोहराया कि अवैध संबंध नैतिक रूप से गलत हो सकते हैं, लेकिन जब तक उनका आत्महत्या से सीधा और स्पष्ट संबंध साबित न हो, तब तक धारा 306 आईपीसी लागू नहीं की जा सकती। इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए अपील को खारिज कर दिया।

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