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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में जहरीली शराब का कहर-नवागढ़ में दो ग्रामीणों की मौत आबकारी विभाग पर उठे सवाल

छत्तीसगढ़ / छत्तीसगढ़ में अवैध और जहरीली शराब का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां गुरुवार देर शाम जहरीली शराब पीने से दो ग्रामीणों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान सीताराम सतनामी (65) और रोहित तेंदुलकर (25) के रूप में हुई है। घटना के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों ने आबकारी विभाग की लापरवाही पर सवाल उठाते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है घटना का पूरा विवरण ग्राम भठली-उदयभाठा में गुरुवार शाम दोनों ने शराब पी थी, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और उनके मुंह से झाग निकलने लगा। ग्रामीणों ने तत्काल उन्हें सीएचसी नवागढ़ पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने सीताराम को मृत घोषित कर दिया, जबकि गंभीर हालत में रोहित को जिला अस्पताल रेफर किया गया। इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि गांव के ही राम गोपाल नामक व्यक्ति ने दोनों को देसी शराब दी थी। परिजनों का कहना है कि यह अवैध शराब थी, जिसे इलाके में बेचा जा रहा था आबकारी विभाग की बड़ी लापरवाही इस घटना के बाद आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

1. अवैध शराब पर नियंत्रण क्यों नहीं? – ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार लंबे समय से चल रहा है, लेकिन प्रशासन और आबकारी विभाग इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे।

2. हर बार मौत के बाद ही कार्रवाई क्यों? – छत्तीसगढ़ में जहरीली शराब से मौत की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं, लेकिन विभाग की लापरवाही के चलते ऐसे हादसे दोहराए जा रहे हैं।

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3. कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति? – पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और शराब के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं, लेकिन क्या प्रशासन सिर्फ पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार करेगा या फिर दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी?

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ग्रामीणों में आक्रोश, दोषियों को सजा देने की मांग मृतकों के परिजनों और गांव के लोगों ने आबकारी विभाग और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने दोषियों को जल्द से जल्द पकड़कर सख्त सजा देने की मांग की है। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों की पुष्टि हो सकेगी। लेकिन सवाल यह है कि आखिर कब तक जहरीली शराब से बेगुनाहों की जान जाती रहेगी और आबकारी विभाग मूकदर्शक बना रहेगा?

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