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IAS/IPSछत्तीसगढ़

असफलता वास्तव में सफलता की कुँजी है, पं मनोज

जांजगीर चांपा – जिला मुख्यालय जांजगीर के समीप ग्राम खोखरा में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन रखा गया है, यह भागवत सामाजिक व्यक्ति स्व:नम्मू राम यादव की स्मृति में किया गया हैं, यह श्रीमद भागवत कथा वृंदावन कोरबा वाले आचार्य मनोज कृष्ण महराज द्वारा किया जा रहा हैं , श्रीमद भागवत कथा में भारी संख्या में ग्रामवासी कथा सुनने पहुंचे , श्रीमद् भागवत कथा के सप्तम दिवस में कथा सुनाते हुए. कहा कि असफलता से घबराएँ नहीं, धैर्यपूर्ण कर्मठता से ही मिलती है – सफलता। असफलता वास्तव में सफलता की कुँजी है, लेकिन हम सब असफलता से सीखने की बजाय हतोत्साहित हो जाते हैं और आगे के प्रयास भी बन्द कर देते हैं। यदि आप जीवन में बड़ा लक्ष्य चाहते हैं, तो निरन्तरता, धैर्य और अनुशासन के साथ अपने लक्ष्य के लिए आगे बढ़ते रहेंगे तो सफलता सुनिश्चित है। सफलता वास्तव में दिन-प्रतिदिन दोहराए जाने वाले छोटे-छोटे प्रयासों का योग है। सफलता में योगदान देने वाले प्रमुख कारकों में से एक है – निरन्तरता।

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किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, चुनौतियों या असफलताओं का सामना करने पर हार न मानते हुए, लगातार उस पर काम करना महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए, जो छात्र अपनी पढ़ाई में उत्कृष्टता प्राप्त करना चाहता है, उन्हें परीक्षा से पहले अन्तिम समय में रटने के बजाय हर दिन लगातार अध्ययन करना चाहिए और अपना काम पूरा करना चाहिए। लगातार छोटे-छोटे प्रयास करने से, छात्र के लम्बे समय में सफल होने की सम्भावना अधिक होती है ।आत्म-विश्वास, दृढ़-निश्चय और शुभ संकल्प जीवन सिद्धि के लिए श्रेष्ठतम साधन हैं। हमारे जीवन में आत्म-विश्वास का होना उतना ही आवश्यक है, जितना किसी पुष्प में सुगन्ध का होना है। सफलता प्राप्त करने के लिए दृढ-निश्चय अति आवश्यक है। सफल बनने के लिए सबसे पहला पड़ाव है – ‘लक्ष्य निर्धारण’। “पूज्यश्री जी” ने कहा कि जिनके जीवन में उद्देश्य नहीं होता, उनका जीवन बिना पतवार की नाव की तरह होता है, जिनमें उद्देश्य, साहस व चरित्र की कमी होती है। वे जीवन को जैसे-तैसे काटते रहते हैं। उद्देश्य के अभाव में उनको न दिशाबोध होता है, न कोई योजना होती है और वे परिस्थितियों के दास होते हैं। सफलता के अभीप्सु व्यक्ति के लिए चित्त की एकाग्रता अनिवार्य है। यदि शक्तियों को एक ही समय में कई बातों में बिखेर दिया जाए, तो सफलता प्रायः संदिग्ध हो जाती है। सभी महान् व्यक्तियों में चित्त की एकाग्रता बहुत अधिक थी। वे अपने उद्देश्य से बाहर की बातों को ध्यान से ही निकाल देते थे। परिस्थितियाँ सम्भवतः कभी व्यक्तियों की सहायता नहीं करती। जिन लोगों ने विजय के लिए घोर संघर्ष किया, अपने मार्ग की बाधाओं से लड़ाई लड़ी, वे ही सफलता के कपाट खोलने में सफल हो पाए हैं।

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