कोरबा में सुशासन फेल? एनजीटी के प्रतिबंध के बाद भी दिन-रात रेत की चोरी, माफियाओं के नाम छुपाने में जुटा विभाग

KORBA: ड्रोन नहीं, अमले को छका रहे रेत चोर! सीतामढ़ी बना अवैध उत्खनन का ‘हॉट स्पॉट’, बेबस नजर आ रहा प्रशासन

 

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कोरबा। जिला सहित शहर क्षेत्र में रेत माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। एनजीटी (NGT) के प्रतिबंध के बावजूद नदी-घाटों में सरेआम ट्रैक्टर उतारकर रेत का अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण धड़ल्ले से जारी है। खनिज अमले की तैनाती के बाद भी माफियाओं की दबंगई कम होने का नाम नहीं ले रही है। 

 

शहर के भीतर सीतामढ़ी, राताखार और बरमपुर घाट रेत चोरी के मुख्य ‘हॉटस्पॉट’ बन चुके हैं। सड़कों पर दौड़ते गीली रेत से लदे वाहन इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं कि नदियों का सीना चीरकर सीधे रेत की सप्लाई की जा रही है। हालांकि, खनिज विभाग छोटी-मोटी कार्रवाई कर आंकड़ों का भारी-भरकम पहाड़ जरूर पेश कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है।

 

ड्रोन से निगरानी सिर्फ दिखावा, माफियाओं के नाम छुपाने का खेल:

खनिज उड़नदस्ता टीम ने बड़े जोर-शोर से ड्रोन के माध्यम से निगरानी शुरू करने का दावा किया था, लेकिन यह प्रयोग सिर्फ एक ही दिन देखने को मिला। चौंकाने वाली बात यह है कि ड्रोन की मदद से जिन जेसीबी और टिप्परों को पकड़ा गया, विभाग ने उनके मालिकों के नाम तक उजागर नहीं किए। हाल-फिलहाल में पकड़े गए मामलों में भी सिर्फ घटना स्थल का जिक्र किया जाता है, जबकि अवैध कारोबार में संलिप्त रसूखदारों के नाम, उन पर लगाए गए जुर्माने और कार्रवाई की जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। पूर्व में रेत चोरों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाती थी, लेकिन अब पुलिस केस दर्ज कराने में विभाग कोई रुचि नहीं दिखा रहा है।

 

दिन-रात हो रही रेत की चोरी, अमला तैनात फिर भी बेअसर:

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सूत्रों के अनुसार, सीतामढ़ी रेत घाट पर सुबह से लेकर रात के अंधेरे तक बड़े पैमाने पर मजदूरों को लगाकर अवैध खनन कराया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि मौके पर खनिज अमले की तैनाती होने के बावजूद इस चोरी को क्यों नहीं रोका जा पा रहा है? आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि प्रशासन इन रेत माफियाओं पर जरूरी सख्ती नहीं दिखा पा रहा है?

 

नेताओं की चुप्पी पर उठ रहे सवाल:

प्रदेश में सुशासन की सरकार का दावा करने वाले भाजपा के पदाधिकारी और नेता अन्य मामलों में तो बढ़-चढ़कर बोलते हैं, लेकिन रेत चोरों के खिलाफ उनकी चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। भाजपा नेताओं द्वारा रेत माफियाओं पर न तो कोई सख्ती दिखाई जा रही है और न ही कार्रवाई की मांग की जा रही है, जिससे आम जनता के बीच तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं।

 

माफियाओं के अवैध निर्माण पर कब चलेगा बुलडोजर?

शहरवासियों के बीच इस बात की भी चर्चा है कि जिस तरह जिला प्रशासन और सुशासन सरकार अवैध कबाड़ व अपराधियों के अवैध निर्माण को बुलडोजर से ढहा रही है, ठीक वैसी ही सख्त कार्रवाई रेत माफियाओं के खिलाफ भी होनी चाहिए। रेत के अवैध कारोबार से अर्जित की गई आय से अधिक संपत्ति की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) से कराई जानी चाहिए। 

 

इसके साथ ही इस बात की भी जांच जरूरी है कि विभाग के भीतर से माफियाओं के लिए मुखबिरी कौन कर रहा है? क्योंकि अक्सर देखा जाता है कि खनिज अमला दफ्तर से कार्रवाई के लिए निकलता बाद में है, और माफियाओं के पास सूचना पहले पहुंच जाती है, जिससे अमले के पहुंचने से पहले ही मैदा

न साफ हो जाता है।

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