कोरबा (छत्तीसगढ़): उरगा थाना क्षेत्र में एक सरकारी स्कूल के शिक्षक को सूदखोरी और मानसिक प्रताड़ना का शिकार बनाने का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित शिक्षक ने ₹5 लाख के कर्ज के बदले ₹6.88 लाख चुका दिए थे, इसके बावजूद आरोपी उन पर ₹10 लाख अतिरिक्त देने या दो एकड़ जमीन नाम करने का दबाव बना रहा था। परेशान होकर पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद आरोपी के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है।
📌 मुख्य मामला क्या है?
ग्राम कोथारी के रहने वाले विजेंद्र कुमार पाटले (माध्यमिक शाला दादर कला में शिक्षक) ने साल 2022 में अपनी बहन की शादी के लिए गांव के ही विष्णु प्रसाद लहरे से ₹5 लाख उधार लिए थे।
कड़ी शर्तें: आरोपी विष्णु ने मदद के बहाने 5% मासिक ब्याज की भारी शर्त रखी।
दस्तावेज जब्त किए: सुरक्षा के नाम पर आरोपी ने शिक्षक, उनकी मां और भाई के साइन किए हुए कोरे स्टांप पेपर, एटीएम कार्ड, पासबुक और 6 ब्लैंक चेक अपने पास रख लिए।
💰 अब तक कितना भुगतान हुआ?
जून 2022 में शिक्षक के खाते में ₹5 लाख ट्रांसफर किए गए।
शिक्षक ने शुरुआती 4 महीनों तक हर महीने ₹25-25 हजार (कुल 1 लाख) ब्याज दिया।
जनवरी 2023 में बैंक के जरिए ₹44,000 दिए गए।
जुलाई और अगस्त 2024 में अपना खेत बेचकर गवाहों के सामने कुल ₹5.44 लाख नगद चुकाए गए।
कुल भुगतान: शिक्षक अब तक ₹6,88,000 चुका चुके हैं।
⚠️ प्रताड़ना और ब्लैकमेलिंग
एक बार ब्याज देने में देरी होने पर आरोपी ने शिक्षक के परिवार पर जमीन नाम करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। ₹6.88 लाख मिलने के बाद भी आरोपी की नीयत खराब हो गई और वह ₹10 लाख अतिरिक्त या दो एकड़ जमीन की मांग करने लगा। बात न मानने पर उसने ब्लैंक चेक में ₹4 लाख भरकर बैंक में लगा दिया और बाकी दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर जेल भिजवाने की धमकी देने लगा।
👮 पुलिस की कार्रवाई
लगातार मिल रही धमकियों से तंग आकर शिक्षक ने उरगा थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी विष्णु प्रसाद लहरे के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है:
लागू धाराएं: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 384 (अवैध वसूली/जबरन वसूली) और छत्तीसगढ़ ऋणियों का संरक्षण (साहूकारी) अधिनियम की धारा 3 व 4।
वर्तमान स्थिति: पुलिस ने मामला पंजीकृत कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

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