KORBA BREAK: हिन्द एनर्जी पर हत्या का संगीन आरोप, वृद्ध आदिवासी को अपनी हत्या का अंदेशा, राष्ट्रपति से लगाई गुहार

सनसनीखेज खुलासा: आदिवासी चपरासी को डायरेक्टर बनाकर खरीदी करोड़ों की बेनामी संपत्ति

राष्ट्रपति सचिवालय से छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को जांच के निर्देश जारी

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कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक बेहद सनसनीखेज और गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ एक 62 वर्षीय वृद्ध आदिवासी कांति कुमार प्रधान ने ‘हिन्द एनर्जी एंड कोल बेनिफिकेशन (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड’ के संचालकों पर उनके शोषण, धोखाधड़ी और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए राष्ट्रपति से न्याय और जीवन रक्षा की गुहार लगाई है। पीड़ित ने एक अन्य आदिवासी कर्मचारी की संदिग्ध मौत का जिक्र करते हुए खुद की जान को भी गंभीर खतरा बताया है।

आदिवासी चपरासी को धोखे से बनाया डायरेक्टर:

पीड़ित कांति कुमार प्रधान के अनुसार, वह वर्ष 2006 से ‘हिन्द एनर्जी’ कंपनी में चपरासी के पद पर कार्यरत था। आरोप है कि कंपनी के निदेशकों—संजय अग्रवाल, पवन कुमार अग्रवाल, सतीश कुमार अग्रवाल, राजीव अग्रवाल व अन्य ने उसकी निरक्षरता का लाभ उठाकर वर्ष 2006 से 2020 के बीच धोखे से उसे कंपनी का डायरेक्टर (निदेशक) बना दिया। इस दौरान उसके नाम पर करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्तियां और वित्तीय लेनदेन किए गए।

आयकर छापे में खुलासे के बाद हत्या का प्रयास:

वर्ष 2020 में जब आयकर विभाग की कार्रवाई के दौरान इस जालसाजी का खुलासा हुआ, तो पीड़ित ने अपने परिचित अंकित सिंह के माध्यम से पुलिस को इसकी सूचना दी। पीड़ित का आरोप है कि इसके बाद तत्कालीन थाना प्रभारी हरीशचंद्र टंडेकर और एएसआई मनोज मिश्रा ने कंपनी प्रबंधन से साठगांठ कर ली। “एसपी का आदेश है” का झूठा बहाना बनाकर बिना वारंट के उसे अंकित सिंह के घर से जबरदस्ती उठाने और जान से मारने का प्रयास किया गया, लेकिन अंकित सिंह ने बीच-बचाव कर उसकी जान बचाई।

संवैधानिक तंत्र की विफलता और सुरक्षा की मांग:

पीड़ित का कहना है कि वर्ष 2020 की इस घटना के बाद भी अब तक इस मामले में कोई एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं हुई है और न ही दोषी पुलिसकर्मियों पर कोई कार्रवाई की गई है। पीड़ित ने महामहिम राष्ट्रपति से निम्नलिखित मांगें की हैं:

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सीबीआई (CBI) जांच के निर्देश देकर दोषी पुलिस अधिकारियों और कंपनी के सभी 12 निदेशकों को गिरफ्तार किया जाए।

पीड़ित कांति कुमार और मुख्य गवाह अंकित सिंह को सीआरपीएफ (CRPF) की सुरक्षा दी जाए।

नाम पर दर्ज समस्त बेनामी संपत्तियों को जब्त कर उसे निर्दोष घोषित किया जाए।

14 वर्षों के शोषण और प्रताड़ना के एवज में 5 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।

पीड़ित ने भावुक होते हुए कहा कि उनके साथ काम करने वाले एक अन्य आदिवासी सोहन सिंह पोर्ते की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है, जिसके पीछे इसी कंपनी का हाथ होने का संदेह है। पीड़ित का कहना है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो उनके जीवन को कुछ भी खतरा होने पर इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। मांग पूरी न होने पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी भी दी है।

राष्ट्रपति सचिवालय से मुख्य सचिव को निर्देश जारी:

इस मामले में 22 मई 2026 को पीड़ित द्वारा राष्ट्रपति, एनएचआरसी (NHRC), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और सुप्रीम कोर्ट को पत्र भेजे जाने के बाद बड़ी कार्रवाई हुई है। 27 मई 2026 को राष्ट्रपति सचिवालय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को “उपयुक्त कार्रवाई” के लिए अग्रेषित कर दिया है। साथ ही की गई कार्रवाई की सीधी सूचना प्रार्थी को देने के निर्देश दिए हैं।

आरओसी (ROC) की भूमिका पर भी सवाल:

पीड़ित का आरोप है कि दो वर्ष पूर्व उन्होंने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (ROC) छत्तीसगढ़ में मनी लॉन्ड्रिंग और बेनामी लेनदेन के सभी पुख्ता दस्तावेजों के साथ शिकायत की थी। बार-बार ईमेल और रजिस्टर्ड डाक भेजने के बावजूद आरओसी द्वारा आज तक कोई जांच शुरू नहीं की गई है। आयकर विभाग (ITAT) की ऑर्डर शीट से भी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई लंबित होने की पुष्टि होती है, जिसके बाद भी कार्रवाई न होना एक गरीब आदिवासी की आवाज को दबाने के प्रयास की  ओर इशारा करता है।

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