कोरबा/बिलासपुर। कोरबा जिले में डीजल, कोयला और कबाड़ के अवैध कारोबार की तरह ही अब खतरनाक केमिकल युक्त बैटरियों के स्क्रैप का काला कारोबार भी धड़ल्ले से चल रहा है। पर्यावरणीय नियमों और अनुमति को ताक पर रखकर किए जा रहे इस अवैध परिवहन का मामला छत्तीसगढ़ में पहली बार इतने बड़े स्तर पर सामने आया है। हैरान करने वाली बात यह है कि 13 जून को पकड़ा गया यह गंभीर मामला अब तक कार्रवाई की बाट जोह रहा है।
प्रशासनिक सुस्ती और लटकी कार्रवाई:
सीएसईबी पुलिस सहायता केंद्र के अंतर्गत डीडीएम स्कूल मार्ग (हरिमंगलम के पास) में पर्यावरण विभाग की टीम ने सूचना के आधार पर राजस्थान पासिंग की एक गाड़ी को पकड़ा था। इस गाड़ी में बिना किसी पर्यावरणीय अनुमति और संदेहास्पद जीएसटी बिल के सहारे भारी मात्रा में बैटरियों का स्क्रैप लोड किया जा रहा था। शनिवार और रविवार को शासकीय अवकाश होने के कारण उम्मीद थी कि सोमवार या मंगलवार तक कोई ठोस कार्रवाई होगी, लेकिन कार्यालयीन समय बीत जाने के बाद भी जिम्मेदार विभागों की चुप्पी बरकरार है।
बिलासपुर में भी फैला रसूखदारों का जाल:
इसी बीच बिलासपुर जिले के सिरगिट्टी ओवरब्रिज सर्विस सेंटर के पास स्थित एक कबाड़ गोदाम में भी ऐसा ही खेल पकड़ा गया है। सूत्रों के मुताबिक, कोरबा के रसूखदार कारोबारी अशोक अग्रवाल द्वारा संचालित इस गोदाम में अवैध रूप से भारी मात्रा में पुरानी बैटरियां खरीदी जा रही थीं और इन्हें बिना किसी सुरक्षा मानक के हैदराबाद भेजने की तैयारी थी, जिस पर पर्यावरण विभाग की टीम ने दबिश दी है।
कैंसर और गंभीर बीमारियों का मंडराता खतरा:
बैटरी के इस अवैध कारोबार का सबसे खतरनाक पहलू जनस्वास्थ्य से जुड़ा है। गोदामों में बैटरियों को कबाड़ के भाव खरीदकर उनका तेजाब और केमिकल युक्त दूषित पानी खुले मैदानों या नालियों में बहा दिया जाता है। इस कबाड़ और रिसाइकलिंग प्रक्रिया के दौरान हवा में घुलने वाले घातक टॉक्सिक तत्व आसपास के रिहायशी इलाकों में कैंसर, सांस और त्वचा से जुड़ी गंभीर बीमारियों को खुला न्यौता दे रहे हैं। नियमानुसार इस काम के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रायपुर मुख्यालय या बिलासपुर क्षेत्रीय कार्यालय से अनिवार्य अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) लेना होता है, जिसका यहाँ खुलकर उल्लंघन किया जा रहा है।
अधिकारियों की भूमिका और आंकड़ों का खेल:
इस पूरे मामले में विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी संदेहास्पद नजर आ रही है। सूत्रों का दावा है कि जब्त किए गए माल की वास्तविक मात्रा लगभग 35 टन है, लेकिन मामले को दबाने और हल्का करने के लिए जिम्मेदार अधिकारी कागजों में इसे महज 15 टन दर्शा रहे हैं। शहर के बीचों-बीच चल रहे इस जानलेवा खेल के पीछे विभागीय सांठगांठ की आशंका जताई जा रही है।
अब जीएसटी टीम करेगी टैक्स चोरी की जांच:
इस बड़े सिंडिकेट और कागजी हेराफेरी का पर्दाफाश करने के लिए पर्यावरण विभाग ने आगे की सघन कार्रवाई और टैक्स चोरी की कड़ियों को जोड़ने का जिम्मा जीएसटी (GST) विभाग को सौंप दिया है। जीएसटी टीम की एंट्री से अब इस अवैध कारोबार की वित्तीय गड़बड़ियों और बड़े टैक्स घोटाले के उजागर होने की संभावना है। अब देखना यह है कि कोरबा और बिलासपुर के इन दोनों मामलों में प्रशासन कितनी सख्त कार्रवाई करता है।

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