कोरबा/बिलासपुर। कोरबा लोकसभा क्षेत्र की सांसद ज्योत्स्ना महंत ने कोयला खदानों से प्रभावित भू-विस्थापित परिवारों के रोजगार और आजीविका को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने SECL के सीएमडी को पत्र लिखकर मौजूदा नीतियों में बड़े बदलाव की मांग की है।
सांसद ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था के तहत केवल लगभग 20 प्रतिशत प्रभावित परिवारों को ही रोजगार मिल पा रहा है, जबकि 80 प्रतिशत लोग अब भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि रोजगार के अभाव में लगातार हो रहे आंदोलन और धरना-प्रदर्शन से उत्पादन और राजस्व दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
👉🏻 रोजगार और अवसर बढ़ाने के लिए प्रमुख मांगें
सांसद महंत ने विस्थापित परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव दिए हैं:
भू-विस्थापित फर्मों व सहकारी समितियों के लिए टेंडर सीमा 5 लाख से बढ़ाकर कम से कम 20 लाख रुपये करने की मांग
वार्षिक टेंडर सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव
आउटसोर्सिंग कार्यों में कम से कम 80% भर्ती स्थानीय विस्थापित परिवारों से अनिवार्य करने की मांग
SECL में चार पहिया वाहनों के सभी टेंडर पूर्णतः भू-विस्थापितों के लिए आरक्षित करने का सुझाव
👉🏻 मेगा प्रोजेक्ट्स में स्थानीय भागीदारी जरूरी
सांसद ने गेवरा, दीपका और कुसमुंडा जैसे बड़े कोयला परियोजनाओं में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि SECL प्रबंधन इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगा और आवश्यक संशोधन करेगा, जिससे हजारों प्रभावित परिवारों को रोजगार के अवसर मिल सकें।
👉🏻 “जमीन हमारी, हक भी हमारा”
सांसद ज्योत्स्ना महंत ने स्पष्ट कहा कि विकास का विरोध नहीं है, लेकिन विस्थापितों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जिनकी जमीन पर परियोजनाएं खड़ी हुई हैं, उन परिवारों का पहला हक रोजगार और आजीविका पर होना चाहिए।
👉🏻 पहले भी उठ चुका है मुद्दा
गौरतलब है कि भू-विस्थापितों के लिए 5 लाख रुपये तक के टेंडर आरक्षण की व्यवस्था 2021-22 में लागू की गई थी, जिसे बढ़ाने का आश्वासन दिया गया था। हालांकि, अब तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं, जिससे प्रभावितों में नाराजगी बनी हुई है।
- इस मुद्दे पर अब फिर से आवाज तेज हो गई है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में इस पर ठोस निर्णय लिया जाएगा।



कोरबा/बिलासपुर। कोरबा लोकसभा क्षेत्र की सांसद ज्योत्स्ना महंत ने कोयला खदानों से प्रभावित भू-विस्थापित परिवारों के रोजगार और आजीविका को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने SECL के सीएमडी को पत्र लिखकर मौजूदा नीतियों में बड़े बदलाव की मांग की है।
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