
नई दिल्ली: वैश्विक ऊर्जा बाजार इस समय बड़े अस्थिर दौर से गुजर रहा है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच कूटनीतिक वार्ताओं के विफल होने के बाद तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। Iran के सख्त रुख के चलते पहले ही बाजार में अनिश्चितता बनी हुई थी, जिसके परिणामस्वरूप ब्रेंट क्रूड की कीमतें 103 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर चुकी हैं।
इसी बीच Donald Trump के एक संभावित फैसले ने हालात को और गंभीर बना दिया है। उन्होंने Strait of Hormuz में पूर्ण नौसैनिक नाकेबंदी का संकेत दिया है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है।
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस नाकेबंदी को लागू किया जाता है, तो कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। यह स्थिति न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था को झटका देगी, बल्कि विशेष रूप से विकासशील देशों में महंगाई को बेकाबू कर सकती है।
ओनिक्स कैपिटल ग्रुप के प्रबंध निदेशक जॉर्ज मोंटेपेक ने इस संभावित कदम की आलोचना करते हुए कहा कि हाल ही में तेल कीमतों में आई 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी केवल शुरुआती संकेत है। उनके अनुसार, यदि इस जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो प्रतिदिन लगभग 12 मिलियन बैरल तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
विश्लेषकों का यह भी मानना है कि Persian Gulf के अन्य तेल उत्पादक देशों पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा, जिससे निर्यात ठप हो सकता है। इस बीच, ईरान की ओर से मिल रही जवाबी चेतावनियों ने क्षेत्र में संघर्ष की आशंका को और बढ़ा दिया है।
यदि मौजूदा हालात में सुधार नहीं होता, तो वैश्विक बाजार को महंगे तेल और आर्थिक दबाव के नए दौर के लिए तैयार रहना पड़ सकता है।

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