6000 करोड़ महादेव सट्टा कांड की परछाईं फिर लौटी, नए ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट पर समय रहते कार्रवाई

कांकेर का हेड कॉन्स्टेबल विजय कुमार पांडे सस्पेंड, राजनांदगांव कनेक्शन पर PHQ अलर्ट

रायपुर | 1 फरवरी 2025
छत्तीसगढ़ में कुख्यात महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप घोटाले की परछाईं एक बार फिर राज्य की कानूनव्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। करीब 6000 करोड़ रुपये के इस घोटाले से जुड़े पुराने नेटवर्क के दोबारा सक्रिय होने की आशंका के बीच पुलिस मुख्यालय ने असाधारण तत्परता दिखाते हुए एक नए उभरते ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट को पनपने से पहले ही बड़ा झटका दिया है।

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प्रदेश के प्रतिष्ठित दैनिक अखबार के हितवाद के खोजी पत्रकार मुकेश एस सिंह ने इस मामले को गंभीरता से प्रकाशित किया जिसके बाद खबर सोसल मीडिया में तेजी से वायरल होना शुरू हो गया।

इस कार्रवाई के केंद्र में रहे कांकेर जिले में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल विजय कुमार पांडे, जिन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामला सीधे राजनांदगांव कनेक्शन से जुड़ा होने के चलते पुलिस मुख्यालय पूरी तरह सतर्क मोड में है।

इनपुट मिलते ही शीर्ष स्तर पर एक्शन

सूत्रों के अनुसार, कांकेर और राजनांदगांव जिलों से मिले पुख्ता इनपुट के बाद यह मामला सीधे पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (इंटेलिजेंस) अमित कुमार तक पहुंचा। जानकारी में बताया गया कि हेड कॉन्स्टेबल विजय पांडे हाल के दिनों में कुछ ऐसे राज्य पुलिस सेवा (SPS) अधिकारियों के संपर्क में थे, जिनका हाल ही में रायपुर से राजनांदगांव तबादला हुआ है।

इन इनपुट्स में आरोप है कि विजय पांडे कथित तौर पर सट्टा संचालकों और पुलिस तंत्र के बीचलायज़ॉन लिंककी भूमिका निभा रहे थे और बदले में मासिक प्रोटेक्शन मनी के जरिए कार्रवाई से राहत दिलाने की कोशिश की जा रही थी।

इन गंभीर आरोपों के बाद कांकेर एसपी निखिल राखेचा ने बिना देरी किए विजय पांडे को सस्पेंड करने का आदेश जारी किया।

निलंबन के बाद रहस्यमय ग़ायब

निलंबन आदेश जारी होते ही हेड कॉन्स्टेबल विजय पांडे का अचानक संपर्क से बाहर हो जाना पुलिस मुख्यालय के लिए चिंता का विषय बन गया है। इसे सामान्य प्रशासनिक चूक मानने के बजाय, इसे संभावित सबूत मिटाने या फरार होने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

पुलिस मुख्यालय ने कांकेर और राजनांदगांव पुलिस को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
कांकेर एसपी को पांडे की मूवमेंट और अनुपस्थिति पर तत्काल रिपोर्ट देने को कहा गया है।
वहीं, राजनांदगांव एसपी अंकिता शर्मा को जमीनी स्तर पर निगरानी और सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

साथ ही यह भी साफ किया गया है कि यदि विजय पांडे के खिलाफ कोई भी पुष्ट साक्ष्य या औपचारिक शिकायत सामने आती है, तो तत्काल आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए।

महादेव सट्टा कांड से पुराना रिश्ता

इस पूरे मामले को और गंभीर बनाता है विजय कुमार पांडे का महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप घोटाले से पुराना संबंध। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जांच में उनका नाम पहले ही सामने चुका है।

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जांच के दौरान यह खुलासा हुआ था कि 2021 में विजय पांडे दुबई गए थे, जहां कथित तौर पर उनकी मुलाकात महादेव ऐप के प्रमोटर्स रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर से हुई थी। विवाद इस बात को लेकर है कि यह यात्रा सरकारी अनुमति के बिना की गई और बाद में इसके लिएएक्स पोस्ट फैक्टोमंजूरी ली गई।

मौखिक आदेश और संदिग्ध अटैचमेंट

उस समय विजय पांडे कांकेर जिले के डिस्ट्रिक्ट क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (DCRB) में पदस्थ थे। जांच एजेंसियों के अनुसार, उन्हें एक प्रभावशाली वरिष्ठ अधिकारी के साथ बिना लिखित आदेश, केवल मौखिक निर्देश पर अटैच किया गया था।

सूत्रों का दावा है कि यही वरिष्ठ अधिकारी उस छोटे लेकिन प्रभावशाली समूह का हिस्सा थे, जिन पर ईडी ने महादेव सट्टा सिंडिकेट से प्रोटेक्शन मनी लेने के आरोप लगाए हैं।

फर्जी आवेदन और PHQ की संदिग्ध भूमिका

मामले में नया मोड़ तब आया जब यह सामने आया कि दुबई यात्रा के लिएएक्स पोस्ट फैक्टोमंजूरी का आवेदन कथित तौर पर चंद्रभूषण वर्मा ने तैयार किया था। वर्मा उस समय सहायक उप निरीक्षक (ASI) थे और फिलहाल निलंबित होकर रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं।

सूत्रों के अनुसार, यह आवेदन केवल संदिग्ध था, बल्कि इसके बावजूद पुलिस मुख्यालय की प्रशासनिक शाखा ने इसकी अनुशंसा कर स्वीकृति दिलाई। यह प्रक्रिया आज भी जांच एजेंसियों के लिए रहस्य बनी हुई है।

ईडी के सेक्शन 50 बयान में अहम नाम

22 अगस्त 2023 को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज सेक्शन 50 के बयान में चंद्रभूषण वर्मा ने स्पष्ट रूप से विजय कुमार पांडे को उस समूह का सदस्य बताया था, जो 2021 में दुबई गया था।

वर्मा के अनुसार, इस नेटवर्क में भीम यादव, अर्जुन यादव और सहदेव सिंह यादव भी शामिल थे। बयान में यह भी दावा किया गया कि ये लोग नागपुर के हवाला ऑपरेटरों से बड़ी नकदी इकट्ठा कर उसे कथित तौर पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचाते थे।

यह बयान ईडी की पहली प्रोसिक्यूशन कंप्लेंट में RUD-39 के रूप में विशेष PMLA कोर्ट में दाखिल है।

केंद्रीय एजेंसियां भी अलर्ट

ताज़ा घटनाक्रम के बाद हेड कॉन्स्टेबल विजय पांडे के निलंबन और उसके रहस्यमय ग़ायब होने की जानकारी अब CBI और ED तक भी पहुंच चुकी है। केंद्रीय एजेंसियां राज्य पुलिस के साथ समन्वय में पांडे को जल्द ट्रेस कर पूछताछ की तैयारी में हैं।

सूत्रों का कहना है कि पहले की जांच में कुछ अहम कड़ियां छूट गई थीं, खासकर उन वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ नहीं हो पाई थी, जिन्होंनेएक्स पोस्ट फैक्टोविदेशी यात्रा को मंजूरी दी थी। यही कारण है कि इस ताज़ा घटनाक्रम को महादेव सट्टा कांड की अधूरी जांच से जोड़कर देखा जा रहा है।

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