बिलासपुर। LCIT ग्रुप ऑफ कॉलेजेस, जिसे क्षेत्र का प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान माना जाता है, अब खुद अपने वादों के नीचे दबता नजर आ रहा है। हर वर्ष दाखिले के दौरान आधुनिक लैब, अनुभवी फैकल्टी और विश्वस्तरीय सुविधाओं का दावा करने वाले इस कॉलेज की जमीनी सच्चाई कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है।

????️ बारिश ने खोली लैब्स की पोल – बाल्टियों से हो रहा रिसाव का इलाज!
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कॉलेज की प्रयोगशालाएं पूरी तरह से जर्जर अवस्था में नजर आ रही हैं। छत से लगातार टपकते पानी को रोकने के लिए लैब में बाल्टियाँ रखी गई हैं। जिन स्थानों पर छात्रों को उन्नत मशीनों के साथ व्यावहारिक शिक्षा मिलनी चाहिए, वहां अब वे छत से गिरते पानी से बचते नजर आते हैं।
देखिए वीडियो????
https://youtube.com/shorts/W2AVmR2WmQc?si=lQSmipYKECrG6oOV
छात्रों का सवाल वाजिब है – जब प्रयोगशालाएं ही सुरक्षित नहीं, तो शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों की सुरक्षा की क्या गारंटी है?
???????? फैकल्टी – सिर्फ दस्तावेज़ों तक सीमित!
कॉलेज प्रबंधन भले ही अनुभवी और विशेषज्ञ शिक्षकों की मौजूदगी का दावा करता हो, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। छात्रों के मुताबिक, कई विषयों की कक्षाएं नियमित नहीं होतीं और कुछ शिक्षक केवल नाम के लिए नियुक्त हैं। कॉलेज में उनकी वास्तविक उपस्थिति या शिक्षण गतिविधि नाम मात्र की है।

???????? इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रिंसिपल भी ‘औपचारिक’!
विश्वस्त सूत्रों की मानें तो कॉलेज के इंजीनियरिंग विभाग के प्रिंसिपल फुल टाइम उपस्थित नहीं रहते। केवल औपचारिकता निभाने के लिए उनका नाम कागजों पर दर्शाया जाता है। यह छात्रों के करियर और शैक्षणिक गुणवत्ता के साथ सीधे तौर पर समझौता है।
???? स्टाफ चयन पर भी उठे गंभीर सवाल
जानकारी के अनुसार, कॉलेज में कार्यरत कई कर्मचारी या तो इसी संस्थान के पूर्व छात्र हैं, या अन्य कॉलेजों से हटाए गए लोग। ऐसे में शिक्षा की निष्पक्षता, गुणवत्ता और नैतिकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
????️ एनसीईआरटी कॉलेज हॉस्टल की सच्चाई भी उजागर
केवल क्लासरूम ही नहीं, हॉस्टल की स्थिति भी चिंताजनक है। एक हल्की बारिश ने ही भवन की गुणवत्ता की पोल खोल दी। छात्राओं द्वारा सोशल मीडिया पर वायरल किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे छत से पानी टपकता है और कमरों में सीलन भरी हुई है।
बाहरी रूप से सुंदर दिखने वाला हॉस्टल अंदर से पूरी तरह जर्जर है। इसके बावजूद प्रबंधन छात्रों से मोटी फीस वसूल कर केवल औपचारिक सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है।

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