कोरबा-कुसमुंडा। एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र द्वारा आयोजित “SECL Summer Camp 2026” को लेकर स्थानीय खदान प्रभावित परिवारों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इंदिरा स्टेडियम कुसमुंडा में 18 मई से 10 जून 2026 तक आयोजित होने वाले इस 21 दिवसीय समर कैंप में केवल एसईसीएल कर्मचारियों के बच्चों को शामिल किए जाने की बात सामने आने के बाद लोगों ने इसे भेदभावपूर्ण बताया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन गांवों की जमीन पर खदानें स्थापित हुईं, जिन परिवारों ने विस्थापन और प्रदूषण का सबसे अधिक असर झेला, उनके बच्चों को इस तरह के आयोजनों से बाहर रखना दुर्भाग्यपूर्ण है। लोगों का आरोप है कि कंपनी बच्चों के विकास, फिटनेस और रचनात्मक गतिविधियों की बात तो करती है, लेकिन खदान प्रभावित परिवारों के बच्चों को अवसर देने में पीछे हट जाती है।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि कुसमुंडा, गेवरा, दीपका और आसपास के कई गांवों के परिवार वर्षों से प्रदूषण, ब्लास्टिंग, भारी वाहनों की आवाजाही और पर्यावरणीय समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इसके बावजूद उनके बच्चों को ऐसे सामाजिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों में प्राथमिकता नहीं दी जाती।
स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया है कि यदि कंपनी वास्तव में सामाजिक दायित्व और सामुदायिक विकास के प्रति गंभीर है, तो समर कैंप जैसे आयोजनों में खदान प्रभावित और विस्थापित परिवारों के बच्चों के लिए भी सीटें आरक्षित की जानी चाहिए थीं।
लोगों का कहना है कि एसईसीएल और कोल इंडिया द्वारा हर वर्ष CSR और सामुदायिक विकास के नाम पर बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थानीय और प्रभावित परिवार खुद को उपेक्षित महसूस करते हैं।
क्षेत्रवासियों ने कंपनी प्रबंधन से मांग की है कि समर कैंप में खदान प्रभावित बच्चों को भी शामिल किया जाए, ताकि स्थानीय समुदाय और कंपनी के बीच विश्वास और सहभागिता मजबूत हो सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक समर कैंप का मामला नहीं, बल्कि उन परिवारों के अधिकार और सम्मान का सवाल है, जिन्होंने वर्षों पहले अपनी जमीन और संसाधन उद्योग के विकास के लिए समर्पित किए थे।

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