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कोरबा: ‘जब कोयला जला ही नहीं, तो बुझाया किसे?’ अदृश्य आग के नाम पर ₹4.28 करोड़ का बड़ा घोटाला!

कोरबा: कोल इंडिया लिमिटेड की अनुषंगी कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के कुसमुंडा क्षेत्र से भ्रष्टाचार का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरटीआई (RTI) कार्यकर्ता और पत्रकार जितेंद्र कुमार साहू द्वारा निकाली गई जानकारियों से खुलासा हुआ है कि कागजों पर ‘काल्पनिक आग’ दिखाकर सरकारी खजाने से ₹4.28 करोड़ के फंड का बंदरबांत किया गया है।

दो सरकारी विभागों की आपसी कागजी जंग से खुला राज:

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इस घोटाले की पुष्टि खुद कुसमुंडा परियोजना के दो अलग-अलग विभागों द्वारा लिखित पत्रों से होती है, जिनके दावों में जमीन-आसमान का अंतर है:

सिविल विभाग का दावा (करोड़ों का खर्च): पत्र क्रमांक SECL/GM(M)/KSM/C/26/520 (दिनांक 27/04/2026) के अनुसार, वर्ष 2020 से 2025 के बीच कोल स्टॉक में आग बुझाने के नाम पर कुल ₹4,27,96,191 खर्च किए गए।

खनन/खान विभाग का दावा (शून्य नुकसान): इसके विपरीत खदान का रिकॉर्ड रखने वाले खान प्रबंधक के पत्र क्रमांक Ref.No: SECL/GM(M)/KSM/14 (दिनांक 28/04/2026) में साफ लिखा है कि— “वर्ष 2020 से आज तक कोल स्टॉक मेजरमेंट में आग से कोयले का कोई नुकसान नहीं हुआ है।”

बड़ा सवाल: जब माइनिंग विभाग कह रहा है कि 5 साल में एक ग्राम कोयला भी आग से नष्ट नहीं हुआ, तो सिविल विभाग ने ₹4.28 करोड़ आखिर किस ‘अदृश्य आग’ को बुझाने में फूंक दिए?

कागजों पर ‘आग बुझाने’ के खर्च का पूरा लेखा-जोखा:

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सिविल विभाग द्वारा अलग-अलग अवधियों में किया गया संदिग्ध भुगतान इस प्रकार है:

01.04.2020 से 05.05.2021 तक: ₹26,89,324.00

19.04.2022 से 17.06.2022 तक: ₹35,40,000.00

01.04.2022 से 31.03.2024 तक: ₹1,21,02,670.00

20.06.2023 से 18.06.2024 तक: ₹1,12,08,643.00

15.11.2024 से 14.11.2025 तक: ₹27,77,777.00

01.12.2024 से 30.11.2025 तक: ₹1,04,77,777.00

👉 5 वर्षों का कुल कथित खर्च: ₹4,27,96,191.00

PMO, ED और CBI की चौखट पर पहुंचा मामला:

दस्तावेजों के साथ पुख्ता सबूत मिलने के बाद आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्र कुमार साहू ने देश की सर्वोच्च जांच एजेंसियों को आधिकारिक शिकायत भेज दी है। दिनांक 23/06/2026 को डाक के माध्यम से इन विभागों को FIR दर्ज करने हेतु पत्र प्रेषित किया गया है:

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO)

प्रवर्तन निदेशालय (ED) – मनी लॉन्ड्रिंग की जांच हेतु

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) – आपराधिक षड्यंत्र की जांच हेतु

CVC, CAG और लोक लेखा समिति

दोषियों की संपत्ति कुर्क करने की मांग:

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि इस संगठित भ्रष्टाचार में शामिल SECL कुसमुंडा के संबंधित परियोजना अभियंता (सिविल), तत्कालीन महाप्रबंधकों (GMs) और निजी ठेकेदारों के खिलाफ ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम’ के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। साथ ही पिछले 5 वर्षों के कोल स्टॉक का फॉरेंसिक और फिजिकल ऑडिट कराकर दोषियों की संपत्तियां कुर्क की जाएं।

अब देखना यह है कि केंद्रीय कोयला मंत्रालय और जांच एजेंसियां इस गंभीर वित्तीय जालसाजी पर क्या कार्रवाई करती हैं।

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प्रखरभूमि एक RNI में पंजीकृत साप्ताहिक समाचार पत्र है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2013 में हुई। अब इसका डिजिटल संस्करण भी इस वेबसाइट के माध्यम से पाठकों तक उपलब्ध है, जहां छत्तीसगढ़ सहित देश-दुनिया की महत्वपूर्ण और विश्वसनीय खबरें प्रकाशित की जाती हैं।

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