Janjgir News:– बच्चों को धमकी,धर्म का अपमान और जातिगत टिप्पणी करने वाले शिक्षक की, कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई…देखिये वायरल,video. …

कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई न नहीं से ग्रामीणों में रोष — बोले,अब आंदोलन ही आखिरी रास्ता

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Janjgir News:– जांजगीरचांपा जिले के पामगढ़ विकासखंड स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय डोंगाकोहरौद एक बार फिर विवादों की आग में घिर गया है। प्रभारी प्राचार्य कुंजकिशोर के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने, जातिगत टिप्पणी, बच्चों को धमकाने, अतिरिक्त शुल्क वसूली, बच्चों को डरानेधमकाने और शैक्षणिक अनुशासन तोड़ने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला तब तूल पकड़ गया जब उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें वे विद्यार्थियों को अपशब्द कहकर धमकाते नजर रहे हैं। इस पूरे मामले की शिकायत कलेक्टर जनदर्शन में भी दर्ज कराई, गई है लेकिन अब कोई कार्रवाई होने से लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे अब आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

Janjgir News:–जांजगीरचांपा।
विकासखंड पामगढ़ स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय डोंगाकोहरौद एक बार फिर विवादों के घेरे में गया है। विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य कुंजकिशोर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, छात्रों को धमकाने और जातिगत टिप्पणियां करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। इस पूरे मामले ने शिक्षा जगत के साथसाथ स्थानीय समाज में भी तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है।

ताजा मामला उस वक्त सुर्खियों में आया, जब कुंजकिशोर का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में वे विद्यालय परिसर में बच्चों को अपशब्द कहते हुए, “चरित्र खराब कर देनेऔरऐसा सर्टिफिकेट बनानेकी धमकी देते नजर रहे हैं, जिससे छात्र किसी अन्य विद्यालय में पढ़ाई जारी रख सकें। वीडियो में उनकी भाषा और रवैया केवल अमर्यादित है बल्कि बच्चों के मानसिक उत्पीड़न का भी साफ संकेत देता है।

पहले भी हुआ था वीडियो विवाद, कार्रवाई सिर्फ खानापूर्ति तक सीमित

यह पहली बार नहीं है जब प्रभारी प्राचार्य विवादों में आए हों। कुछ समय पहले उनका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे बच्चों से स्कूल की लिपाईपोताई और सफाई करवाते दिखाई दिए थे। जांच में वह वीडियो सही पाया गया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई गईशिक्षक को भुईगांव में अटैच कर दिया गया था।
अब जब एक और गंभीर मामला सामने आया है, तो अभिभावकों ने सवाल उठाया है
क्या हर बार ऐसे शिक्षकों को केवल अटैचमेंट की ढाल दी जाएगी?

प्रधान पाठक से अभद्रता, आदेश का पालन भी नहीं

ग्रामीणों ने बताया कि कुंजकिशोर ने कुछ महीने पहले मिडिल स्कूल के प्रधान पाठक रामसाय कश्यप के साथ बैठक के दौरान गालीगलौज और अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया था।
उस घटना पर संयुक्त संचालक, शिक्षा बिलासपुर ने प्राचार्य का इंक्रीमेंट रोकने का आदेश दिया था, मगर आज तक उसका पालन नहीं हुआ।

धार्मिक परंपराओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी का हस्तलिखित पत्र और वीडियो

नए विवाद में कुंजकिशोर का एक हस्तलिखित पाठ्ययोजना प्रपत्र और वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने हिंदू धार्मिक परंपराओं को लेकर अभद्र टिप्पणी की है।
वीडियो में उन्होंनेपूजापाठ, जाप, प्राण प्रतिष्ठाजैसी परंपराओं कोपाखंड और अंधविश्वास बताया है।
यह टिप्पणी सामने आने के बाद गांव में गुस्से का माहौल है। अभिभावकों का कहना है कि

ऐसे शब्दों से न केवल धर्म का अपमान हुआ है, बल्कि बच्चों के मन में भी हमारी संस्कृति के प्रति गलत सोच पैदा करने की कोशिश की गई है।”

जातिगत टिप्पणियों और भय का वातावरण

ग्रामीणों के अनुसार, कुंजकिशोर लंबे समय से जातिगत भेदभावपूर्ण रवैया रखते आए हैं।
कई अभिभावकों ने आरोप लगाया कि वे समाज विशेष के लोगों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं और बच्चों को डराकर पढ़ाई से विमुख करने की कोशिश करते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह का रवैया शिक्षा व्यवस्था को दूषित कर रहा है और विद्यालय का वातावरण असुरक्षित हो गया है।

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कलेक्टर जनदर्शन में दी गई शिकायत, फिर भी कार्रवाई नहीं

ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत 3 नवंबर को कलेक्टर जनदर्शन में की थी।
शिकायत में वायरल वीडियो, धार्मिक टिप्पणियां और भेदभावपूर्ण व्यवहार करने सहित कई गंभीर आरोप लगे हैं ।इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे अभिभावक और अधिक आक्रोशित हैं। लोगों का कहना है कि विभाग ने फिर से अस्थायी अटैचमेंट के जरिए खानापूर्ति की है।

दी गई शिकायत (क्रमवार)

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1.
विद्यालय के वातावरण को लेकर शिकायत: अभिभावकों का आरोप है कि प्रभारी प्राचार्य श्री कुंज किशोर और सहायक विज्ञान शिक्षिका श्रीमती लता सिंह पूरे दिन प्राचार्य कक्ष में ही रहते हैं। इससे विद्यालय का शैक्षणिक वातावरण दूषित हो रहा है और बच्चों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
2.
धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप: शिकायत में कहा गया है कि प्रभारी प्राचार्य कक्षाओं में हिंदू देवीदेवताओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करते हैं और सनातन धर्म को बदनाम करने की कोशिश करते हैं।
3.
अधिक फीस वसूली का मामला: कक्षा 12वीं विज्ञान के छात्रों से 950 रुपये, गणित संकाय के छात्रों से 870 रुपये और कला संकाय के छात्रों से 790 रुपये वसूले गए हैं, जबकि वास्तविक फीस क्रमशः 760 रुपये, 680 रुपये और 600 रुपये है। इस तरह प्रति छात्र करीब 190 रुपये अतिरिक्त वसूले गए हैं।
4.
पूर्व में भी अतिरिक्त वसूली का आरोप: शिकायत में यह भी बताया गया है कि पूर्व वर्षों में एडमिशन फीस के नाम पर प्रत्येक विद्यार्थी से 100 रुपये अतिरिक्त वसूले गए थे। उस समय भी शिकायत की गई थी, लेकिन किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई।
5.
खेल वर्दी को लेकर धमकी: अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि प्रभारी प्राचार्य बच्चों को स्पोर्ट्स ड्रेस नहीं खरीदने पर स्कूल से निकालने की धमकी दे रहे हैं, जिससे विद्यार्थी भय और दबाव में हैं।
6.
प्रैक्टिकल में कम अंक देने की धमकी: प्राचार्य की अनुचित बातों का विरोध करने वाले छात्रों को प्रोजेक्ट और प्रैक्टिकल में कम नंबर देने की धमकी दी जाती है। कई विद्यार्थियों को जानबूझकर कम अंक देकर उनका भविष्य खराब करने की कोशिश की गई है।
7.
बच्चों से जबरन काम करवाने का आरोप: बच्चों से जबरन स्कूल की रंगाईपुताई करवाई जा रही है। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, जो इन आरोपों की पुष्टि करता है।
8.
प्रधान पाठक से अभद्र व्यवहार: शिकायत में यह भी उल्लेख है कि प्रभारी प्राचार्य ने मिडिल स्कूल के प्रधान पाठक श्री रामसाय कश्यप के साथ मीटिंग के दौरान गालीगलौज की थी। इस मामले में संयुक्त संचालक, शिक्षा विभाग, बिलासपुर द्वारा उनका इन्क्रीमेंट रोकने का आदेश दिया गया था, लेकिन अब तक उसका पालन नहीं हुआ है।

अभिभावकों की मांग और चेतावनी:

अभिभावकों ने इन सभी गंभीर बिंदुओं को आधार बनाते हुए प्रभारी प्राचार्य श्री कुंज किशोर के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि इन घटनाओं ने विद्यालय के शैक्षणिक माहौल और विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला है। अभिभावकों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि विभाग द्वारा शीघ्र और ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे सामूहिक रूप से उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे और जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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