✖
🔔

प्रखरभूमि न्यूज़

प्रखरभूमि में बेहतरीन खबरों को तुरंत पाने के लिए अभी सब्सक्राइब करें।

📊 12,000+ पाठक पहले ही जुड़ चुके हैं
IAS/IPSछत्तीसगढ़बड़ी ख़बर🏙️ राज्य व शहर

Bilaspur Highcourt News:– केवल परिवीक्षा पूरी होना नहीं बनाता स्थायी, कार्य और आचरण रिपोर्ट भी जरूरी

Bilaspur। बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण सेवा मामले में स्पष्ट किया है कि केवल परिवीक्षा अवधि पूरी होने पर किसी कर्मचारी का स्थायीकरण या पदोन्नति का दावा स्वतः नहीं बनता। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी की कार्य और आचरण रिपोर्ट भी सकारात्मक होनी चाहिए, और प्रतिकूल रिपोर्ट के आधार पर प्रमोशन रोकना या देना भेदभाव नहीं माना जाएगा।

Advertisement Carousel

Ro No. 13952/35

मामले की पृष्ठभूमि:
हाईकोर्ट ने अनुवादक के पद पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। शैलेन्द्र सोनी सहित कई उम्मीदवारों ने आवेदन किया। परीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद, 29 फरवरी 2012 को अपीलकर्ता शैलेन्द्र और अन्य प्रतिवादी को अनुवादक के पद पर नियुक्त किया गया। प्रतिवादी शैलेन्द्र से कनिष्ठ था।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पूरी होने पर, शैलेन्द्र के साथ अन्य परिवीक्षा कर्मी को 7 मार्च 2014 से स्थायी किया गया, और 27 जनवरी 2015 को सहायक ग्रेड-I में प्रमोट किया गया। वहीं, शैलेन्द्र का स्थायीकरण उस समय नहीं हुआ।

देर से स्थायी होने का प्रभाव:
स्थायीकरण में देरी के कारण शैलेन्द्र को प्रमोशन से वंचित होना पड़ा। व्यथित होकर उन्होंने 29 अप्रैल 2015 को अभ्यावेदन पेश किया, जिसमें अपनी वरिष्ठता बनाए रखने और पूर्वव्यापी प्रभाव से स्थायीकरण एवं पदोन्नति की मांग की। अभ्यावेदन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की।

  "डीएसपी बने, तोहफे में मिला नक्सली इलाका!" 21 टीआई को पदोन्नति के साथ मिली नई पोस्टिंग अफसरों की पहली पोस्टिंग,

सिंगल बेंच ने 16 जुलाई 2025 को याचिका खारिज कर दी। अपीलकर्ता ने इसके बाद डिवीजन बेंच में अपील दाखिल की।

डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के निर्णय को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि कार्य और आचरण रिपोर्ट (ACR) स्थायीकरण और पदोन्नति के लिए अलग आधार हैं। मार्च 2014 में शैलेन्द्र की दो साल की परिवीक्षा अवधि पूरी होने पर उसकी कार्य और आचरण रिपोर्ट औसत या अच्छी नहीं पाई गई। इसलिए देर से स्थायीकरण और प्रमोशन में वंचित होना भेदभाव नहीं माना जाएगा।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी सेवा में स्थायीकरण और पदोन्नति केवल परिवीक्षा पूरी होने पर नहीं, बल्कि कर्मचारी के कार्य और आचरण पर आधारित होती है।

Live Cricket Info

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button