यह रहा आपका आर्टिकल साफ़, संतुलित और प्रोफेशनल न्यूज़ स्टाइल में री-राइट किया हुआ: कोरबा: नराईबोध के ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू, खदान के पास डटे

कोरबा। दक्षिण पूर्व कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की गेवरा परियोजना से प्रभावित ग्राम नराईबोध के ग्रामीणों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 15 अप्रैल से खदान क्षेत्र के समीप अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। ग्रामीणों ने बड़े पंडाल में जुटकर आंदोलन का ऐलान करते हुए साफ कर दिया है कि जब तक मांगों का समाधान नहीं होगा, वे पीछे नहीं हटेंगे।

इससे पहले 13 अप्रैल को ग्रामीणों ने भठोरा फेस का काम ठप कर अपनी रणनीति का संकेत दे दिया था। अब उन्होंने आर-पार की लड़ाई का रुख अपनाते हुए आंदोलन को तेज कर दिया है।

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प्रमुख मांगें

ग्रामीणों का कहना है कि निम्नलिखित मांगों पर ठोस कार्रवाई के बिना आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा:

विस्थापन के बदले सभी सुविधाओं के साथ उचित बसाहट और पूर्ण मुआवजा

प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर स्थायी रोजगार और पीएनसी कंपनी में वैकल्पिक रोजगार

जीपीएस सर्वे के आधार पर पारदर्शी मूल्यांकन कर मुआवजे का त्वरित भुगतान

पार्षद अनिला राकेश पटेल ने कहा कि वर्षों से विकास के नाम पर जमीन देने के बावजूद ग्रामीणों को सिर्फ आश्वासन ही मिला है। उन्होंने कहा कि अब कागजी वादों से काम नहीं चलेगा और जब तक अधिकार नहीं मिलते, आंदोलन जारी रहेगा।

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आंदोलन की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि 13 अप्रैल को ग्राम पंचायत नराईबोध के नेतृत्व में ग्रामीणों ने सुबह से ही भठोरा फेस का काम बंद करा दिया था। उस दौरान प्रशासन और प्रबंधन को चेतावनी दी गई थी कि मांगों पर त्वरित कार्रवाई नहीं होने पर 15 अप्रैल से अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।

वर्तमान में बड़ी संख्या में ग्रामीण प्रदर्शन स्थल पर मौजूद हैं। उनका कहना है कि प्रबंधन की लापरवाही के कारण उन्हें अपने ही अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। ग्रामीण शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ संकल्प के साथ अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं।

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