कोरबा-दर्री। दर्री की नीलगिरी बस्ती में परम पूज्य संत गुरु घासीदास जी की जयंती पूरी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन के सुपुत्र रजनीश देवांगन थे। उन्होंने पवित्र जैतखाम की विधिवत पूजा-अर्चना कर बाबा गुरु घासीदास को नमन किया।
💬 “छुआछूत और सामाजिक कुरीतियों पर किया कड़ा प्रहार”
रजनीश देवांगन ने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए बाबा गुरु घासीदास के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर प्रकाश डाला:
“पूजनीय गुरु घासीदास जी एक महान संत थे। उन्होंने ‘मनखे मनखे एक समान’ (सभी मनुष्य एक समान हैं) का अमर संदेश देकर समाज में समरूपता और भाईचारे की अलख जगाई। उन्होंने तत्कालीन समाज में व्याप्त छुआछूत, जातिगत विषमताओं और कुरीतियों पर कड़ा प्रहार कर सतनामी समाज सहित पूरे मानव समाज में एक नई क्रांति की शुरुआत की।”
📜 गुरु घासीदास जी का प्रेरक जीवन परिचय
कार्यक्रम में बाबा के जीवन संघर्ष और ज्ञान प्राप्ति की यात्रा को भी याद किया गया:
जन्म: गुरु घासीदास जी का जन्म वर्ष 1756 में बलौदाबाजार जिले के गिरौदपुरी धाम में एक अत्यंत गरीब परिवार में हुआ था।
कठिन तपस्या: उन्होंने सत्य और ज्ञान की खोज के लिए गिरौदपुरी के जंगलों में ‘छाता पहाड़’ पर समाधि ली तथा सोनाखान के जंगलों में लंबी तपस्या की।
महाज्ञानी की उपाधि: किसी भी प्रकार की औपचारिक शिक्षा प्राप्त न होने के बावजूद, उन्होंने अपने आत्मबल और कठिन साधना से महाज्ञानी की उपाधि हासिल की।
जयंती: हर साल पूरे देश में 18 दिसंबर को उनकी जयंती गौरव और आस्था के साथ मनाई जाती है।
👥 कार्यक्रम में गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर समाज के अनेक प्रमुख पदाधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से:
सतनाम कल्याण समाज कोरबा के अध्यक्ष यू. आर. महिलांगे, नारायण कुर्रे, मंडल अध्यक्ष नारायण ठाकुर, मनोज लहरे, पूर्व एल्डरमैन तुलसी ठाकुर, पार्षद प्रेमचंद पांडे, रामकुमार राठौर, यासीन खान, नारायण वैष्णव, सुनील भट्टपहरे सहित बड़ी संख्या में राजमहंत, सांटी और सामाजिक जन उपस्थित थे।

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