शहरों के विकास का बनेगा नया रोडमैप, अर्बन चैलेंज फंड से छत्तीसगढ़ को मिलेगा बड़ा अवसर

नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ के शहरों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने और नगरीय निकायों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने पहल तेज कर दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बुधवार को नवा रायपुर में अर्बन चैलेंज फंड (UCF) एवं अर्बन इन्वेस्ट विंडो (UiWIN) पर आयोजित प्रथम क्षेत्रीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस दौरान नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने हुडको और सेप्ट विश्वविद्यालय के साथ दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में शहरों की महत्वपूर्ण भूमिका है। शहरी विकास केवल सड़क, आवास और दूसरी सुविधाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें रोजगार, उद्योग, व्यापार, निवेश और नागरिकों के बेहतर जीवन को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने नगरीय निकायों से ऐसी परियोजनाएं तैयार करने का आह्वान किया, जो वर्तमान जरूरतों के साथ आने वाले दशकों की चुनौतियों का भी समाधान कर सकें।
दो एमओयू से नगरीय निकायों को मिलेगा सहयोग
कार्यशाला के दौरान पहला समझौता हुडको और छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के बीच हुआ, जबकि दूसरा समझौता नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग और सेप्ट विश्वविद्यालय के बीच संपन्न हुआ। इन समझौतों के माध्यम से नगरीय निकायों को परियोजनाओं की योजना बनाने, वित्तीय संसाधन जुटाने, तकनीकी विशेषज्ञता प्राप्त करने और संस्थागत क्षमता बढ़ाने में सहयोग मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शहरी विकास के लिए शासन, वित्तीय संस्थानों और विशेषज्ञ संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। इससे शहरों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण और आर्थिक रूप से व्यवहार्य परियोजनाएं तैयार करने में मदद मिलेगी।
जलभराव और अव्यवस्थित तारों जैसी समस्याओं पर भी ध्यान
मुख्यमंत्री ने नगरीय निकायों को शहरों की बुनियादी समस्याओं के स्थायी समाधान पर जोर देने को कहा। उन्होंने पेयजल, सड़क, जल निकासी, बिजली, परिवहन और स्वच्छता की योजनाओं को समग्र शहरी नियोजन का हिस्सा बनाने की आवश्यकता बताई। बरसात में जलभराव से होने वाली परेशानियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने प्रभावी और दीर्घकालिक ड्रेनेज व्यवस्था विकसित करने पर बल दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि जहां संभव हो, बिजली और अन्य सेवाओं के तारों को भूमिगत करने की योजना बनाई जानी चाहिए। अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर समन्वय से अव्यवस्थित विकास की समस्या कम होगी और नागरिकों को सुरक्षित तथा सुविधाजनक शहरी वातावरण मिल सकेगा।
एक लाख करोड़ रुपये का फंड, निकायों के सामने बेहतर परियोजनाएं तैयार करने की चुनौती
उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव ने बताया कि केंद्र सरकार ने अर्बन चैलेंज फंड के लिए एक लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों के लिए यह विकास का बड़ा अवसर है। निकायों को ऐसी परियोजनाएं तैयार करनी होंगी, जो तकनीकी रूप से मजबूत, आर्थिक रूप से व्यवहार्य और नागरिकों के लिए उपयोगी हों।
अरुण साव ने कहा कि परियोजनाओं की सफलता केवल निर्माण तक सीमित नहीं है। उनके संचालन, रखरखाव और वित्तीय व्यवहार्यता की योजना भी शुरुआत से स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि जनता के धन का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
निजी निवेश और आधुनिक वित्तीय मॉडल पर जोर
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच आवास, पेयजल, सड़क, परिवहन और स्वच्छता जैसी सुविधाओं की मांग बढ़ रही है। ऐसे में नगरीय निकायों को वित्तीय रूप से सशक्त बनाना जरूरी है। उन्होंने बैंक वित्तपोषण, बाजार आधारित संसाधनों और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) जैसे विकल्पों के प्रभावी उपयोग पर जोर दिया।
कार्यशाला में अर्बन चैलेंज फंड, अर्बन इन्वेस्ट विंडो, निवेश योग्य परियोजनाओं, वित्तीय प्रबंधन और आधुनिक शहरी नियोजन पर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया। उद्देश्य नगरीय निकायों को ऐसे विकास मॉडल अपनाने में सक्षम बनाना है, जिनसे नागरिक सुविधाओं में सुधार के साथ शहरों की आर्थिक क्षमता भी बढ़े।
2047 के विकसित भारत के लक्ष्य से जुड़ा शहरी विकास
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ को वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देना है। इसके लिए ऐसे शहरों का निर्माण जरूरी है, जो निवेश आकर्षित करें, रोजगार के नए अवसर पैदा करें और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराएं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अपने शहरों की वास्तविक जरूरतों को समझकर दीर्घकालिक विकास योजनाएं बनाने का आह्वान किया।
कार्यशाला में प्रदेश के नगर निगमों के महापौर, नगर पालिकाओं के अध्यक्ष, वरिष्ठ अधिकारी, हुडको के प्रतिनिधि और शहरी विकास क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हुए। राज्य सरकार को उम्मीद है कि कार्यशाला और हुए समझौतों से छत्तीसगढ़ के शहरों में सुनियोजित विकास, वित्तीय आत्मनिर्भरता और आधुनिक अधोसंरचना को नई गति मिलेगी।

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