धान खरीदी केंद्र में 1490 क्विंटल धान की कमी, 35 लाख से अधिक की गड़बड़ी -खरीदी प्रभारी और संस्था प्रबंधक पर कार्रवाई की मांग, प्रशासन से जांच की अपील

बिलासपुर- बिलासपुर जिले के सेवा सहकारी समिति क्रमांक 687 एरमसाही धान खरीदी केंद्र में बड़ी वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार धान खरीदी रिकॉर्ड और भौतिक स्टॉक के मिलान में 1490.40 क्विंटल धान की कमी पाई गई है, जिससे शासन को लगभग 35 लाख 30 हजार 750 रुपये का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है।

यह मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर सहकारिता विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों में हलचल मच गई है। रिपोर्ट के अनुसार धान खरीदी केंद्र में धान संग्रहण के दौरान स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक उपलब्ध धान के बीच बड़ा अंतर पाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि लंबे समय से रिकॉर्ड का सही मिलान नहीं किया गया था, जिसके कारण यह गड़बड़ी धीरे-धीरे बढ़ती गई।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार एरमसाही धान खरीदी केंद्र में धान खरीदी प्रभारी रंजीत कुमार घृतलहरे और संस्था प्रबंधक बबलू राम घृतलहरे की जिम्मेदारी तय की जा रही है। दोनों अधिकारियों के कार्यकाल के दौरान ही धान की कमी का यह मामला सामने आया है। प्रशासनिक स्तर पर इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया प्रारंभ करने की मांग की गई है।

मामले का विवरण इस प्रकार है—
धान खरीदी केंद्र: सेवा सहकारी समिति क्रमांक 687 एरमसाही
धान खरीदी प्रभारी: रंजीत कुमार घृतलहरे
संस्था प्रबंधक: बबलू राम घृतलहरे
धान की कमी: 1490.40 क्विंटल
अनुमानित वित्तीय नुकसान: 35,30,750 रुपये

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सूत्रों के अनुसार इस संबंध में जिला प्रशासन को लिखित शिकायत भेजी गई है, जिसमें कलेक्टर, उप आयुक्त सहकारिता एवं सहकारी संस्थाओं के उप पंजीयक सहित संबंधित बैंक अधिकारियों से विस्तृत जांच कर कार्रवाई करने का निवेदन किया गया है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि समय रहते स्टॉक सत्यापन नियमित रूप से किया जाता, तो इतनी बड़ी कमी सामने नहीं आती।

स्थानीय किसानों में भी इस घटना को लेकर चिंता देखी जा रही है, क्योंकि धान खरीदी केंद्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार होते हैं। किसानों का कहना है कि यदि खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता नहीं रहेगी तो भुगतान और भंडारण व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक जांच के बाद विस्तृत ऑडिट कर वास्तविक जिम्मेदारी तय की जाएगी। यदि गड़बड़ी प्रमाणित होती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। यह मामला सहकारिता तंत्र में निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता को भी उजागर करता है।

जिला प्रशासन द्वारा आगे की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में चल रही धान खरीदी प्रक्रिया के बीच सामने आया यह मामला व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर रहा

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