हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: व्याख्याता को BEO का प्रभार देना नियमों के खिलाफ, सरकार का आदेश निरस्त

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़े एक अहम मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि शैक्षणिक संवर्ग के शिक्षकों को प्रशासनिक पदों (जैसे BEO) की जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने एक व्याख्याता को ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) का प्रभार देने संबंधी राज्य सरकार के आदेश को नियमों के विपरीत मानते हुए तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है।

🚨 क्या था पूरा मामला?

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याचिकाकर्ता: रवि कुमार गौतम (सहायक ब्लॉक शिक्षा अधिकारी – ABEO), जिनकी नियुक्ति 2015 में प्रशासनिक संवर्ग में हुई थी। वे जुलाई 2025 से प्रभारी BEO के रूप में कार्यरत थे।

विवाद की वजह: 10 जून 2026 को शिक्षा विभाग ने रवि कुमार गौतम को हटाकर एक व्याख्याता (लेक्चरर) अनिल कुमार शर्मा को BEO का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया था। इस आदेश को रवि कुमार गौतम ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

정कार का तर्क: राज्य सरकार ने दलील दी कि रवि कुमार का कार्य संतोषजनक नहीं था, इसलिए उन्हें हटाया गया। हालांकि, सरकार इसके समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज या रिकॉर्ड पेश नहीं कर सकी।

🏛️ हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां और आधार

जस्टिस बिभू दत्त गुरु की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं के आधार पर आदेश को निरस्त किया:

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संवर्गों का विभाजन: छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा नियम 2026 के तहत शैक्षणिक और प्रशासनिक संवर्ग पूरी तरह अलग-अलग हैं। प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति के नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

BEO पद के लिए पदोन्नति का नियम: नियम के अनुसार, BEO के 75% पद सहायक ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों (ABEO) की पदोन्नति से और 25% पद नियमित प्राचार्यों (Principals) से भरे जाने का प्रावधान है। संबंधित व्याख्याता इन दोनों योग्यताओं में फिट नहीं बैठते थे।

RTE कानून का उल्लंघन: कोर्ट ने ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009’ की धारा 27 का हवाला देते हुए कहा कि जनगणना या विशेष परिस्थितियों को छोड़कर शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक या प्रशासनिक कार्यों में नहीं लगाया जा सकता, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

🎯 निष्कर्ष

हाईकोर्ट ने 10 जून 2026 को जारी शिक्षा विभाग के विवादित आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। अदालत के इस फैसले से यह साफ संदेश गया है कि शिक्षा विभाग में कोई भी प्रभार या नियुक्ति केवल और केवल विभागीय नियमों के अनुरूप ही होनी चाहिए।

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