भारत पर्व में छत्तीसगढ़ की कला का जलवा ! PM मोदी ने की बस्तर के शिल्पकारों से मुलाकात, डोकरा-बांस शिल्प और कोसा की सराहना

रायपुर, 30 अक्टूबर 2026। गुजरात के एकता नगर में आयोजित भारत पर्व में छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला, संस्कृति और पर्यटन की अनूठी झलक देखने को मिल रही है। राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर आयोजित इस पर्व का शुभारंभ करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के स्टॉल का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने बस्तर और नारायणपुर के शिल्पकारों से आत्मीय बातचीत की तथा उनकी पारंपरिक कला और हुनर की सराहना की।
बस्तर के कलाकारों से प्रधानमंत्री की आत्मीय बातचीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के स्टॉल पर बांस शिल्प सहित विभिन्न लोकशिल्पों का निर्माण कर रहे कलाकारों से बातचीत की। उन्होंने शिल्प निर्माण की प्रक्रिया और कलाकारों के हुनर के बारे में जानकारी ली। इस दौरान बस्तर की सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाते हुए कलाकारों ने बस्तरिया रेला की प्रस्तुति देकर प्रधानमंत्री का स्वागत किया।
कलाकारों की प्रस्तुति और पारंपरिक शिल्पकला ने भारत पर्व में छत्तीसगढ़ की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को सामने रखा।
डोकरा, लौह शिल्प, बांस कला और कोसा साड़ियों की प्रदर्शनी
छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की ओर से लगाए गए स्टॉल में प्रदेश की पारंपरिक हस्तशिल्प कला को प्रदर्शित किया गया है। यहां डोकरा शिल्प, लौह शिल्प, बांस से बनी कलाकृतियों और कोसा साड़ियों को स्थान दिया गया है। इन कलाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ की पारंपरिक विरासत और स्थानीय शिल्पकारों की रचनात्मकता को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया जा रहा है।
पर्यटन मंडल की डॉ. सुभदा चतुर्वेदी के अनुसार, 15 दिनों तक चलने वाले भारत पर्व में छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और पर्यटन को व्यापक रूप से प्रदर्शित किया जा रहा है।
चित्रकोट और चंपारण सहित पर्यटन स्थलों की जानकारी
भारत पर्व में छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों और पर्यटन रिसॉर्ट की जानकारी भी प्रदर्शित की गई है। स्टॉल पर चित्रकोट और चंपारण जैसे प्रमुख स्थलों के साथ प्रदेश के पर्यटन आकर्षणों को प्रस्तुत किया गया है। इसका उद्देश्य देशभर से आने वाले आगंतुकों को छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और पर्यटन की संभावनाओं से परिचित कराना है।
राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान
भारत पर्व में छत्तीसगढ़ की भागीदारी प्रदेश की पारंपरिक हस्तशिल्प कला और सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान देने का अवसर है। बस्तरिया रेला की प्रस्तुति, पारंपरिक शिल्प और पर्यटन स्थलों की जानकारी के जरिए राज्य की विविधता को एक ही मंच पर प्रदर्शित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्टॉल का अवलोकन और शिल्पकारों से संवाद इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा।

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