संस्कृतिछत्तीसगढ़दिवस विशेषदेशधर्मपर्वपर्व त्यौहारबड़ी ख़बरब्रेकिंग

Navami Puja 2026 : महानवमी कब है ? जानिए मां सिद्धिदात्री की पूजा का शुभ मुहूर्त, कन्या पूजन की विधि और व्रत पारण का समय

Shardiya Navratri 2026 : महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा कैसे करें ? कन्या पूजन में क्या चढ़ाएं, हवन कब करें और नौ दिनों का व्रत कब खोलें ? जानिए पूजा की पूरी विधि और जरूरी जानकारी।

प्रखरभूमि न्यूज | धर्म डेस्क। शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना करने वाले श्रद्धालुओं के लिए महानवमी का विशेष महत्व है। इस दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की जाती है। इसके साथ ही कन्या पूजन, हवन और व्रत पारण की परंपरा भी निभाई जाती है।

Advertisement Carousel
R.O. No. : 13952/ 36

इस वर्ष नवमी की तारीख और पूजा के समय को लेकर श्रद्धालुओं के मन में सवाल हैं। आइए जानते हैं महानवमी की तिथि, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, कन्या पूजन और व्रत पारण से जुड़ी जरूरी बातें।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

महानवमी 19 या 20 अक्टूबर को ? जानिए तिथि

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:51 बजे प्रारंभ होकर 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:50 बजे तक रहने की जानकारी प्रकाशित पंचांगों में दी गई है। उदया तिथि और स्थानीय पंचांग की गणना के कारण पूजा की तारीख को लेकर अंतर हो सकता है।

इसलिए कन्या पूजन, हवन और व्रत पारण करने से पहले अपने क्षेत्र के पंचांग या मंदिर के पुजारी से तिथि और समय की पुष्टि अवश्य करें।

महानवमी पूजा का शुभ मुहूर्त

महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा नवमी तिथि के दौरान करना महत्वपूर्ण माना जाता है। पूजा का सटीक मुहूर्त शहर और पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है।

  • नवमी तिथि प्रारंभ : 19 अक्टूबर, सुबह 10:51 बजे
  • नवमी तिथि समाप्त : 20 अक्टूबर, दोपहर 12:50 बजे
  • महानवमी पर्व : प्रकाशित पंचांग के अनुसार 19 अक्टूबर
  • उदया तिथि के अनुसार : कुछ परंपराओं में 20 अक्टूबर को पूजा

ध्यान दें : ये समय प्रकाशित पंचांगों पर आधारित हैं। कोरबा सहित अपने शहर के लिए स्थानीय पंचांग से पूजा का सटीक मुहूर्त जांच लें।

मां सिद्धिदात्री की पूजा कैसे करें ?

1. स्नान और पूजा की तैयारी : सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल की सफाई करें और मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं।

2. मां को भोग अर्पित करें : मां को रोली, अक्षत, पुष्प, नारियल, फल, चुनरी और मिठाई अर्पित करें। सामग्री अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें।

3. मंत्र का जाप करें : मां सिद्धिदात्री का ध्यान करते हुए इस मंत्र का जाप करें।

ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥

4. पाठ और आरती : अपनी परंपरा के अनुसार दुर्गा चालीसा या देवी स्तोत्र का पाठ करें। अंत में मां दुर्गा की आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।

  कवर्धा में पलटी तेज रफ्तार पिकअप, 17 महिलाओं सहित 18 मजदूरों की मौत, डिप्टी सीएम हुए रवाना <br>

मां सिद्धिदात्री को क्या भोग लगाएं ?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां सिद्धिदात्री को नारियल अर्पित करना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार फल, हलवा, पूरी, चना और मिठाई का भोग भी लगा सकते हैं। पूजा के बाद प्रसाद सभी में वितरित करें।

कन्या पूजन कैसे करें ? जानिए पूरी विधि

नवरात्रि की अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन की परंपरा है। छोटी कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका सम्मान किया जाता है।

  • कन्याओं को सम्मानपूर्वक आमंत्रित कर स्वच्छ स्थान पर बैठाएं।
  • परंपरा के अनुसार उनके पैर धोकर रोली और अक्षत से तिलक करें।
  • हलवा, पूरी और काले चने सहित भोजन कराएं।
  • अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा या उपहार दें।
  • कन्याओं का सम्मान करते हुए आशीर्वाद लेकर विदा करें।

कन्या पूजन का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं के प्रति श्रद्धा, सम्मान और सेवा की भावना व्यक्त करना है।

नवमी पर हवन कब करें ?

कई परिवारों में नवमी की पूजा के बाद हवन करने की परंपरा है। हवन में मां दुर्गा के मंत्रों के साथ आहुति दी जाती है। इसकी विधि और समय पारिवारिक परंपरा तथा स्थानीय पंचांग के अनुसार रखें। विस्तृत वैदिक हवन के लिए पुरोहित का मार्गदर्शन लेना उचित है।

नवरात्रि का व्रत कब खोलें ?

नवरात्रि व्रत का पारण व्रत के संकल्प, पूजा-पद्धति और स्थानीय पंचांग पर निर्भर करता है। कई परिवार कन्या पूजन और हवन के बाद व्रत खोलते हैं, जबकि कुछ परंपराओं में दशमी तिथि के अनुसार पारण किया जाता है। इसलिए व्रत खोलने का समय अपने स्थानीय पंचांग या पुरोहित से सुनिश्चित करें।

उपवास के दौरान कमजोरी या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो तो अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें और अनावश्यक रूप से उपवास जारी रखने का दबाव न डालें।

मां सिद्धिदात्री की पूजा का धार्मिक महत्व

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां सिद्धिदात्री नवदुर्गा का नौवां स्वरूप हैं। उन्हें सिद्धि, ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करने वाली देवी माना जाता है। महानवमी पर श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना कर परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करते हैं।

नवरात्रि का यह पर्व श्रद्धा, सेवा, संयम और नारी सम्मान का संदेश देता है।

प्रखरभूमि | छत्तीसगढ़ न्यूज
आपकी खबर, आपकी आवाज़!

Live Cricket Info

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button