
कोरबा। जंगल बचाने की मुहिम में कोरबा वन मंडल ने एक ऐसी पहल की है, जिसने पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ वन भूमि की सुरक्षा का भी मजबूत संदेश दिया है। करतला वन परिक्षेत्र में 7 अगस्त 2026 को वन महोत्सव-2026 के तहत ‘एक पेड़ मां के नाम’ महा-अभियान का आयोजन किया गया। खास बात यह रही कि जिन वन भूमि को पहले अतिक्रमण से मुक्त कराया गया था, उसी जमीन पर अब पौधे रोपकर हरियाली लौटाने की शुरुआत की गई।
अतिक्रमण मुक्त वन भूमि बनी हरियाली की जमीन
वन विभाग की कार्रवाई के बाद अतिक्रमण मुक्त कराई गई वन भूमि पर बड़े स्तर पर पौधारोपण किया गया। इस दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। वन भूमि की सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन को लेकर विभाग की इस पहल का ग्रामीणों ने उत्साह के साथ स्वागत किया।
वन विभाग का स्पष्ट संदेश है कि वन भूमि सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की प्राकृतिक विरासत है। अतिक्रमण से मुक्त कराई गई भूमि पर पौधारोपण को इसी सोच का हिस्सा माना जा रहा है।
पेड़ के साथ जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा का संकल्प
वन महोत्सव के दौरान केवल पौधारोपण तक अभियान सीमित नहीं रहा। ग्रामीणों को वन एवं वन्यजीव संरक्षण, विशेषकर मानव-हाथी द्वंद्व को कम करने के उपायों की जानकारी दी गई।
करतला क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क रहने और हाथियों के साथ सुरक्षित सह-अस्तित्व बनाए रखने की अपील की।
थर्मल ड्रोन से हाथियों पर 24 घंटे नजर
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को बताया गया कि हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वन विभाग आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल कर रहा है।
थर्मल ड्रोन कैमरों से दिन-रात हाथियों की निगरानी, वहीं ‘सजग’ और ‘गज संकेत’ जैसे डिजिटल माध्यमों, व्हाट्सएप ग्रुप और रेडियो कार्यक्रमों के जरिए ग्रामीणों तक हाथियों की लोकेशन और संभावित खतरे की जानकारी पहुंचाई जा रही है।
इसके साथ ही हाथी मित्र दल, कोटवारों तथा रेंज और बीट स्तर के अमले द्वारा भी लगातार गश्त और तत्काल अलर्ट जारी करने की व्यवस्था की गई है।
‘हाथियों को न छेड़ें, दूरी बनाए रखें’
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की कि हाथियों को देखकर उन्हें परेशान करने, छेड़ने या उनके करीब जाने का प्रयास न करें। हाथियों में तनाव बढ़ने से मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति गंभीर हो सकती है।
विभाग ने ग्रामीणों से हाथियों के प्रति सकारात्मक और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की अपील करते हुए कहा कि सतर्कता और सहयोग से ही मानव और हाथियों के बीच संघर्ष को कम किया जा सकता है।
ग्रामीणों ने रोपा पौधा, लिया संरक्षण का संकल्प
वन महोत्सव के अवसर पर वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। लोगों ने पौधारोपण कर प्रकृति और अपनी मां के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
कार्यक्रम ने एक साथ दो महत्वपूर्ण संदेश दिए—अतिक्रमण मुक्त वन भूमि की रक्षा और उस पर हरियाली की वापसी, साथ ही मानव-हाथी सह-अस्तित्व को मजबूत करने की जरूरत।
यह अभियान बताता है कि जंगल की सुरक्षा केवल विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि वन विभाग और ग्रामीणों की साझी भागीदारी से ही जंगल, वन्यजीव और पर्यावरण सुरक्षित रह सकते हैं।
वन महोत्सव-2026 में करतला से निकला संदेश साफ है—
“वन भूमि बचाएंगे, पेड़ लगाएंगे और हाथियों के साथ सुरक्षित सह-अस्तित्व बनाएंगे।”

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