???? बिलासपुर-अंबिकापुर नेशनल हाईवे पर कोयले की काली कमाई: टोल नाका बगदेवा के पास स्थित कश्यप कॉल डिपो में मिलावट का खुला खेल!

???? “कोयले में काला सच!” — नेशनल हाईवे पर रात के अंधेरे में चलताकश्यप डिपोका मिलावट राॅकेट, थाना से 10 KM दूर लूट की खुली दुकान!

बिलासपुर।(रतनपुर)
कोयले की धरती कहलाने वाला छत्तीसगढ़ अब कोयले की मिलावट के गोरखधंधे से शर्मसार हो रहा है। बिलासपुरअंबिकापुर नेशनल हाईवे पर स्थित टोल नाका बगदेवा के पास का कश्यप कॉल डिपो, इन दिनोंकाले हीरेकी काली कमाई का अड्डा बन चुका है। हर रात यहां कानून और ईमानदारी की आंखों में धूल झोंकते हुए, कोयले में पत्थर, गिट्टी और चूरा मिलाकर बड़े पैमाने पर मिलावटी कोयला खपाया जा रहा है।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

???? रात के अंधेरे में चलता है पूरा खेल

स्थानीय सूत्रों की मानें तो ये खेल दिन के उजाले से नहीं, बल्कि रात के अंधेरे में चलता है। जैसे ही आसमान में अंधेरा गहराता है, टॉर्च की रोशनी में कोयले से लदी गाड़ियों को सिग्नल देकर डिपो में प्रवेश कराया जाता है। यहां भीतर ही भीतरकाले खेलको अंजाम दिया जाता हैअसली कोयले को अलग निकालकर उसकी जगह गिट्टी, पत्थर और कोयले की राख का मिश्रण भर दिया जाता है।

???? कैसे होती है मिलावट?

स्टेप-1: असली कोयले की खेप डिपो पहुंचती है।

स्टेप-2: गाड़ियों को टॉर्च के सिग्नल से डिपो के भीतर बुलाया जाता है।

स्टेप-3: अंदर असली कोयले को हटाकर उसमें गिट्टी और चूरे की मिलावट की जाती है।

स्टेप-4: यह घटिया कोयला फिर बाजार या उद्योगों में सप्लाई किया जाता है।

???? करोड़ों की चपत सरकार को

इस मिलावट से न सिर्फ ग्राहकों और उद्योगों को चूना लगाया जा रहा है, बल्कि राज्य और केंद्र सरकार के खजाने को भी करोड़ों की चपत लग रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस मिलावटी कारोबार से सरकार को हर महीने निम्न प्रकार का नुकसान होता है:

  मोबाइल पर की “वर्चुअल शादी”, सुहागरात मनाने भेजा दोस्त — आरोपी गिरफ्तार

खनिज रॉयल्टी से वंचित: असलीयत छुपाने से कम टैक्स जमा होता है।

GST चोरी: अवैध कोयले पर बिलिंग नहीं होती, जिससे जीएसटी नहीं मिलता।

परिवहन कर का नुकसान: अघोषित ट्रांसपोर्ट में कर की चोरी की जाती है।

औद्योगिक नुकसान: घटिया कोयले से बिजली संयंत्रों व फैक्ट्रियों में उत्पादन लागत बढ़ती है।

???? उद्योगों की इसका पर असर

छत्तीसगढ़ के कई उद्योगों में इस डिपो से कोयले की सप्लाई होती है। लेकिन जब गुणवत्ता में मिलावट होती है, तो

उत्पादन कम होता है,

मशीनों की उम्र घटती है,

मेंटेनेंस कॉस्ट बढ़ती है,

और बिजली उत्पादन प्रभावित होता है।

????‍♂️ प्रशासन मौन, सवालों के घेरे में

सबसे हैरानी की बात यह है कि कश्यप डिपो राष्ट्रीय राजमार्ग पर, थाना से कुछ ही दूरी पर स्थित है, फिर भी मिलावट और अवैध गतिविधियां खुलेआम जारी हैं। सवाल उठता है कि क्या ये सब बिना मिलीभगत के संभव है?

स्थानीय नागरिकों ने कई बार खनिज विभाग, पुलिस प्रशासन और राजस्व अमले को शिकायतें सौंपी हैं, लेकिन अब तक इस पर कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई है।

????️ स्थानीय लोगों और संगठनों की मांग

कश्यप डिपो की निर्दलीय जांच हो।

कोयले की सप्लाई से पहले गुणवत्ता की तीसरी एजेंसी से जांच कराई जाए।

डिपो की रात की गतिविधियों की सीसीटीवी निगरानी हो।

दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई हो।

???? रिपोर्टर की टिप्पणी:

कोयले की मिलावट केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि ये संसाधनों की लूट और आम जनता के हितों के साथ खिलवाड़ है।
बिलासपुर जैसे औद्योगिक महत्व वाले जिले में इस तरह की गतिविधियां प्रशासन की छवि को गहरा नुकसान पहुंचा रही हैं। जरूरत है कि शासनप्रशासन इस पर बिना देरी के सख्त कार्रवाई करे और पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया जाए।

Live Cricket Info