RTE के नाम पर फर्जीवाड़ा! बच्चों से मनमाने शुल्क, पोर्टल पर भी गलत जानकारी अपलोड

गरीब बच्चों का हक मारा, शासन को लाखों का नुकसान –

बिलासपुर/कोटा। कोटा विकासखण्ड के ग्राम करवा स्थित सरस्वती विद्यापीठ विद्यालय पर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और गड़बड़ियों के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बीते दस वर्षों से शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत पढ़ रहे बच्चों से नियमों के विरुद्ध शुल्क वसूला जा रहा है। इतना ही नहीं, विद्यालय संचालक और नोडल अधिकारी की मिलीभगत से शासन को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान पहुँचाया गया है।

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ग्रामीणों के अनुसार, स्कूल प्रबंधन गरीब बच्चों से शाला विकास शुल्क, वार्षिक उत्सव शुल्क और परीक्षा शुल्क वसूल रहा है। जबकि आरटीई अधिनियम के अंतर्गत केवल मासिक शुल्क की अनुमति है। प्रदेशभर के जिला शिक्षा अधिकारियों की ओर से स्पष्ट आदेश जारी किए जा चुके हैं कि किसी भी स्थिति में RTE के बच्चों से अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसके बावजूद सहायक बोर्ड अधिकारी और स्कूल संचालक की मिलीभगत से लंबे समय से नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है।

फर्जीवाड़े का आरोप
ग्रामवासियों ने आरोप लगाया कि विद्यालय में जितने बच्चे वास्तव में पढ़ते हैं, उससे कहीं अधिक संख्या ऑनलाइन पोर्टल में दर्ज की गई है। इसी आधार पर शासन से प्रतिपूर्ति राशि ली जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सीधे तौर पर शासन की राशि का गबन है। उनकी मांग है कि अब तक जितनी फर्जी प्रतिपूर्ति ली गई है, उसकी जांच कर वसूली की जाए।

सुविधाओं का अभाव
विद्यालय की स्थिति भी बेहद खराब बताई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार न तो बच्चों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था है, न फर्नीचर और न ही प्रशिक्षित शिक्षक। स्कूल पूरी तरह से शासन से मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि पर निर्भर है और सुविधाओं का नाम तक नहीं है। कई अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है।

शिकायतें हुईं लेकिन कार्रवाई नहीं
राजेश पाण्डेय ने बताया कि कई बार नोडल अधिकारी से शिकायत की गई, लेकिन हर बार मामला दबा दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन और नोडल अधिकारी के बीच साठगांठ है, जिसके चलते शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होती। यहां तक कि पोर्टल पर भी गलत शुल्क अपलोड किए गए हैं और इसकी जानकारी होने के बावजूद अधिकारी मौन हैं।

संचालक लोकशिक्षण नवा
रायपुर से जानकारी लेने पर स्पष्ट उनका कहना है
की सिर्फ पोर्टल में जो महीने का शुल्क स्कूल में ली जा रही है सिर्फ वही अपलोड करना है लेकिन नोडल अधिकारी की मिली भगत से 4000 हजार  की जगह 7000 कराया गया
जबकि विद्यालय की सिर्फ 4000 शुल्क है स्पष्ट दर्शाया गया है

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ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने शासन से मांग की है कि मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उनकी मांग है कि –

1) विद्यालय संचालक और नोडल अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।

2) अब तक हुए गबन की राशि की वसूली की जाए।

3) स्कूल की मान्यता रद्द की जाए।

4) जिम्मेदार अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए।

5) शिक्षा के अधिकार का मज़ाक

नरेंद्र गुप्ता ग्राम करवा निवासी का कहना है कि –  RTE जैसी महत्वपूर्ण योजना का जिस तरह से दुरुपयोग हो रहा है, वह गरीब बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। योजना का उद्देश्य गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को नि:शुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, लेकिन यहां इसका इस्तेमाल सिर्फ अवैध कमाई का जरिया बना लिया गया है। यदि इस मामले की समय पर जांच और कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में ग्रामीण आंदोलन की चेतावनी भी दे रहे हैं।

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