सुबह चार बजे तक मंत्री के चमचे बनाते रहे संपादक पर खबरों की सीरीज रोकने के लिए दबाव, नहीं मानने पर सुबह 5  बजे चलवा दिया प्रेस कार्यालय पर बुलडोजर

अंबिकापुर।योगी के द्वारा उत्तर प्रदेश में अपराधियों के घरों पर चलवाए जाने वाला बुलडोजर अब छत्तीसगढ़ में भी चलवाया जाने लगा है। फर्क सिर्फ इतना है कि यह अपराधियों पर नहीं बल्कि सरकार को सच का आईना दिखाते हुए खबर प्रकाशित करने वाले अधिकारियों के खिलाफ यह बुलडोजर अब चल रहा है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के विभाग में फैली अराजकता और भ्रष्टाचार के मामले उजागर करने पर मंत्री जी के इशारे पर प्रशासन की टीम ने यह बहादुरी दिखाई है। मंत्री जी के आदेश पर प्रशासन की टीम को पूरे शहर में सिर्फ एक इकलौता प्रेस का भवन ही अवैध दिखा और  पूरे शहर में छांट कर इसी प्रेस भवन पर बुलडोजर चला दिया गया।



प्रदेश में कांग्रेस की सरकार में पत्रकारों पर एफआईआर दर्ज होने व उत्पीड़न की खबरें आए दिन सुर्खियां बटोरते रहती थी। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार की विदाई व भाजपा के सत्तारूढ़ होने के बाद पत्रकारों में चौथे स्तंभ की स्वतंत्रता तथा मीडिया व मीडिया कर्मियों की सुरक्षा की उम्मीद जागी थी। पर उम्मीदों पर पानी फेरते हुए भाजपा की सरकार भी कांग्रेस की सरकार की ही तरह पत्रकारों के लिए दमनकारी साबित होती जा रही है। आज भाजपा के एक मंत्री निंदक नियरे राखिए आंगन कुटी छबाय वाले तर्ज पर नहीं चल रही है बल्कि सच का आईना दिखाने वाले पत्रकारों के कार्यालय एवं घरों पर प्रशासन को आदेश दे बुलडोजर चलवा दे रही है।

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चौथे स्तम्भ पर सरकार का प्रहार ,सरकार क़े खिलाफ लिखने का अंजाम घटती घटना अख़बार कार्यालय पर चला बुलडोजर:–


पिछले दिनों सरगुजा मे एक प्रेस कार्यालय को सुबह सुबह सूर्योदय क़े पहले ही तोड़ दिया गया मामले को जानने की कोशिस करने की आखिर देश क़े चौथे स्तम्भ कहे जाने वाली मीडिया प्रेस क़े कार्यालय पर बुलडोजर चलाने की जरूरत आखिर क्यों आन पड़ी, दैनिक घटती घटना समाचार पत्र क़े सम्पादक अविनाश सिँह से बात करने पर ज्ञात हुआ कि स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के ओएसडी के दिव्यांग प्रमाण पत्र को लेकर खबर प्रकाशित की जा रही थी साथ ही उनके तथाकथित भतीजे प्रभारी डीपीएम को लेकर खबर प्रकाशित की जा रही थी, साथ ही स्वास्थ्य मंत्री के विभाग में दिख रही कमियों की खबर प्रकाशित की जा रही थी जिससे क्षुब्ध होकर स्वास्थ्य मंत्री ने जनसंपर्क संचालनालय के आयुक्त को कहकर 20 जून से दैनिक घटती घटना के शासकीय विज्ञापन को बंद कराया उसके बाद भी कमियों की खबर प्रकाशित होती रही जिसके बाद शासकीय विज्ञापन बंद करने का विरोध करते हुए अखबार ने कलम बंद अभियान शुरू किया क्योंकि कमियों की खबर प्रकाशित करने पर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को बांधने का प्रयास किया जा रहा था जब 1 जुलाई से कलमबंद अभियान की शुरुआत हुई तब दो-तीन दिन की मोहलत स्वास्थ्य मंत्री के द्वारा मांगी गई अपने भतीजे डीपीएम सहित अपने ओएसडी पर कार्यवाही करने के लिए फिर भी वह मोहलत पर कार्यवाही नहीं हुई 13 जुलाई 2024 को मंत्री जी का प्रतिनिधिमंडल मिलने पहुंचा दो से तीन दिनों की मोहलत फिर मांगी गई उसके बाद भी कार्यवाही नहीं हुई 23 जुलाई को राज्य शासन ने 152 प्रतिशत वाले योजना को ही रद्द कर दिया इसके बाद आनन फानन में दैनिक घटती घटना कार्यालय वाले परिसर जिसमें 40 साल का कब्जा था 25 साल से कार्यालय संचालित था, उस कार्यालय को तोड़ने के लिए शासन ने फ्री होल्ड वाली योजना को 23 जुलाई को निरस्त किया और निरस्त करने का आदेश पूरे प्रदेश के लिए जारी किया जिस दिन यह आदेश निरस्त किया गया उसी दिन 23 जुलाई को बेदखली का नोटिस अंबिकापुर तहसील कार्यालय द्वारा जारी किया गया और नोटिस दिया गया 26 जुलाई को शाम 6:30 बजे जिस नोटिस को देने पहुंचे और 27 जुलाई 1 दिन का समय दिया बेदखली व सामान हटाने के लिए एक दिन का समय अपर्याप्त था जिस वजह से समय मांगा गया क्योंकि घर में शोक का माहौल था पर समय नहीं दिया गया.

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27 तारीख को फिर से मंत्री जी के प्रतिनिधिमंडल संपादक के घर पहुंचे और सुबह 4:00 बजे भोर तक बैठे रहे बात मनवाने का प्रयास जारी रहा पर अंततः 5:00 बजे प्रशासन का बुलडोजर तोड़ने पहुंच गया, शासन अपने प्रकरण में यह बात बताएं की बेकीमती भूमि है पर सवाल यह उठता है कि बेसकीमती भूमि क्या 40 साल पहले नहीं थी जब कब्जा था तब से लेकर वह बेसकीमती भूमि नहीं थी 25 साल से कार्यालय संचालित था तब बेसकीमती जमीन नहीं थी? जब स्वास्थ्य मंत्री स्वास्थ्य विभाग और सरकार की कमियों की खबर प्रकाशित होने लगी तब वह जमीन बेसकीमती बन गई और उसे पाने के लिए शासन एड़ी चोटी का जोर लगा दिया जबकि इस बेसकीमती जमीन को खरीदने के लिए आवेदन भी लगाया गया था उस आवेदन को भी खारिज किया गया शासन उस जमीन को फ्री में नहीं पैसे से देना चाहती थी?सवाल यहीं नहीं रूकती क्या सरगुजा मे केवल एक ही मकान बेजा कब्जा पर निर्मित हुई है या और भी है? अगर और भी है तो स्पेशली प्रेस कार्यालय को तोड़ने का क्या अर्थ निकलता है यानि मिडिया की आवाज को कुचलने का प्रयास किया जा रहा है।

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