देश का पहला इको-फ्रेंडली जेल यहां कैदी बना रहे जैविक हैंडवाश, सोलर पैनल से बिजली का उत्पादन

 

 

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बिलासपुर सेंट्रल जेल में कैदी प्लास्टिक का ईंट बना रहे हैं, नहाने और एसी-आरओ के पानी से सब्जी उगा रहे है। बिलासपुर सेंट्रल जेल में 18 एकड़ में स्थित है। यहां के 45 बैरकों के ऊपर सोलर पैनल लगाने की भी तैयारी की जा रही है।

 

बिलासपुर। केंद्रीय जेल बिलासपुर देश की पहली ईको-फ्रेंडली (ग्रीन) जेल बन रही है, जो पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए कार्य कर रही है। जेल में पर्यावरणीय को ध्यान में रखते हुए जल संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण और प्लास्टिक मुक्त वातावरण बनाने के लिए काम किए जा रहे हैं। इसके अलावा, कैदी जैविक हैंडवाश बनाने से लेकर सोलर पैनल के माध्यम से बिजली उत्पादन तक कई पर्यावरण-हितैषी कार्यों में शामिल हो रहे हैं। केन्द्रीय जेल, बिलासपुर को ईको-फ्रेंडली बनाने के लिए लघु, मध्यकालीन और दीर्घकालिक लक्ष्यों के तहत चरणबद्ध तरीके से कार्य शुरू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य जेल को पर्यावरण के प्रति पूरी तरह से संवेदनशील बनाना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण छोड़ा जा सके। वर्तमान में यहां 3000 कैदी हैं। इनके द्वारा नहाने और एसी-आरओ प्यूरिफायर से वेस्ट के रूप में निकलने वाले पानी का उपयोग सब्जी उगाने और गार्डनिंग के लिए किया जा रहा है। जेल में वर्तमान में 20 केबी का सोलर पैनल है। इससे उत्पादित बिजली से प्रतिदिन 3 से 4 घंटे तक पूरा जेल रोशन हो रहा है।

जल संरक्षण और प्लास्टिक मुक्त जेल:–

 

केंद्रीय जेल बिलासपुर में जल-संरक्षण और प्लास्टिक मुक्त जेल बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। जेल स्टॉफ और बंदियों को पानी के सही उपयोग के लिए प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे पानी की बर्बादी रोकी जा सके। रेन वाटर हार्वेस्टिंग की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिससे बारिश के पानी को संचित किया जा सके। प्लास्टिक और पॉलिथीन के उपयोग को कम करने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके साथ ही, प्लास्टिक ब्रिक्स (ईंट) बनाने का कार्य भी शुरू किया गया है, जो पर्यावरण के लिए फायदेमंद हैं।

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ग्रीन जेल- हरियाली लाने कैदी कर रहे काम:–

 

जेल में हरियाली का विशेष ध्यान रखा गया है। जेल परिसर में स्थित वनस्पतियों और जीवों के संरक्षण के लिए एनजीओ की मदद से सर्वेक्षण किया गया है। सर्वे के आधार पर, वनस्पतियों और जीवों के संरक्षण और संवर्धन के लिए रोडमैप तैयार किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य यह है कि जेल परिसर न केवल बंदियों के लिए एक सुधारात्मक स्थान हो, बल्कि यह बिलासपुर शहर के लिए ऑक्सीजन जनरेटर के रूप में कार्य करें। इसके लिए कैदी लगातार काम कर रहे हैं।

 

नीबू-संतरे के छिलके से कैदी बना रहे हैंडवॉश:–

पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए जेल में कैमिकल का उपयोग करने से बचने के लिए जेल में बंदी जैविक उत्पादों का निर्माण भी कर रहे हैं। इस समय, जेल में जैविक हैंडवॉश बनाने का कार्य चल रहा है, जिससे न केवल पर्यावरण की सुरक्षा हो रही है, बल्कि कैदियों को रोजगार भी मिल रहा है। यहां कैदी नीबू और संतरे के छिलकों को पीसकर उसमें गुड़ मिलाकर घोल तैयार कर रहे हैं, जिससे प्रतिदिन 3 लीटर जैविक हैंडवॉश तैयार हो रहा है।

 

जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी ने बताया कि 18 एकड़ के 45 बैरक में सोलर लगाने की तैयारी

जेल में पर्यावरण को लेकर विभिन्न गतिविधियां की जा रही हैं। नीबू-संतरे के छिलके से हैंडवॉश, पानी का पुनः उपयोग के साथ ही अब 18 एकड़ जेल परिसर के 45 बैरकों के ऊपर सोलर पैनल लगाने के लिए जिला प्रशासन से बात हुई है। इसके लग जाने से जेल में उपयोग होने के बाद अधिक बिजली उत्पादन को हम बेचकर आय कमा सकते हैं।

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