
Bijapur Naksal Surendra:– 41 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण कर हिंसा से हटकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया है। इन्हें पुनर्वास प्रक्रिया में 50 हजार रुपये की तत्काल आर्थिक मदद दी जाएगी।
Bijapur बीजापुर । राज्य की व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति और शांति, संवाद व विकास के सतत प्रयासों के चलते आज 12 महिला और 29 पुरुष माओवादी कैडरों ने हिंसा छोड़कर समाज में पुनः जुड़ने का निर्णय लिया है। इस समूह में पीएलजीए बटालियन नंबर 01 के पांच सदस्य, तीन एसीएम, ग्यारह प्लाटून और एरिया कमेटी के साथी, दो पीएलजीए सदस्य, चार मिलिशिया प्लाटून कमांडर, एक डिप्टी कमांडर, छह मिलिशिया प्लाटून सदस्य, तथा विभिन्न आरपीसी के जनताना सरकार और डीएकेएमएस, केएएमएस के अध्यक्ष/सदस्य शामिल हैं।
बीजापुर जिले में डीआरजी, बस्तर फाइटर, एसटीएफ, कोबरा और केरिपु बलों के संयुक्त अभियान से तथा छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास व आत्मसमर्पण नीतियों से प्रेरित होकर यह आत्मसमर्पण हुआ है। इस पहल के अंतर्गत उप पुलिस महानिरीक्षक केरिपु सेक्टर बीजापुर बीएस नेगी, पुलिस अधीक्षक बीजापुर डॉ. जितेंद्र कुमार यादव, अति पुलिस अधीक्षक ऑप्स रविन्द्र मीणा, अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
सरेंडर करने वालों में शामिल हैं (कुछ प्रमुख नाम एवं विवरण)-
- पण्डरू हपका उर्फ मोहन, पिता स्व. पाण्डू हपका, उम्र 37 वर्ष, जाति मुरिया, साकिन पदेडा रेगडगट्टापारा, थाना गंगालूर, जिला बीजापुर, पदनाम-बटालियन न0 01 पीपीसीएम, ईनाम 8 लाख रुपये
- बण्डी हपका, पति पण्डरू हपका, उम्र 35 वर्ष, जाति मुरिया, साकिन पदेडा रेगडगट्टापारा, थाना गंगालूर, जिला बीजापुर, पदनाम–बटालियन न0 01 पीपीसीएम, ईनाम 8 लाख रुपये
- लक्खू कोरसा, पिता स्व. मासा कोरसा, उम्र 37 वर्ष, जाति मुरिया, पदेडा मासापारा, थाना गंगालूर, जिला बीजापुर, कंपनी न0 02 पीपीसीएम, ईनाम 8 लाख रुपये
… (सूची जारी है, कुल 41 नाम)
इन सभी कैडरों को पुनर्वास एवं मुख्यधारा में शामिल करने के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य सरकार की नक्सल उन्मूलन नीति ने दक्षिण बस्तर क्षेत्र में शांति की स्थायी नींव रखी है। सुरक्षा बल, प्रशासन, सामाजिक संस्थान और जागरूक नागरिकों के समन्वित प्रयासों से हिंसा की जगह संवाद और विकास को प्राथमिकता मिली है।
मुख्यधारा में लौटे माओवादी कैडर भारतीय संविधान में आस्था जताते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था में सम्मानजनक जीवन बिताने का संकल्प ले चुके हैं। प्रत्येक कैडर को पुनर्वास के तहत तत्काल 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
सुरक्षा बलों की टीमवर्क की बात करें तो डीआरजी, नक्सल सेल, एसटीएफ, कोबरा, और केरिपु की कई बटालियनों ने इस सफलता में अहम भूमिका निभाई है। इन बलों ने लगातार सक्रियता, विश्वास निर्माण और संवेदनशीलता से माओवादियों को शांति की राह अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है।
बीजापुर पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने कहा –
“छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति माओवादियों के लिए आकर्षक साबित हो रही है। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी और उनके परिवार चाह रहे हैं कि वे सामान्य जीवन बिताएं और समाज के अंग बनें।”
“माओवादी हिंसक और विपथगामी विचारधाराओं को त्यागकर निर्भयता से मुख्यधारा में लौटें। पूना मारगेम नीति उनके भविष्य को सुरक्षित, सम्मानजनक और स्वावलंबी बनाने का संपूर्ण प्रयास कर रही है।”
अभियान के अब तक के परिणाम:–
01 जनवरी 2025 से अब तक जिले में माओवादी हिंसा में 528 माओवादी गिरफ्तार हुए, 560 मुख्यधारा में शामिल हुए, और 144 माओवादी मुठभेड़ में मारे गए हैं। 01 जनवरी 2024 से अब तक 790 माओवादी मुख्यधारा में लौटे, 1031 गिरफ्तार, और 202 मारे गए।

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