
रायपुर। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार की नई उपार्जन नीति में छोटे किसानों को राहत देने के लिए अहम प्रावधान किया गया है। इस साल 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू होगी, जो 31 जनवरी 2027 तक चलेगी। नई व्यवस्था के तहत हर दिन जारी होने वाले धान खरीदी के टोकन में कम से कम 70 प्रतिशत टोकन छोटे किसानों के लिए और शेष 30 प्रतिशत टोकन बड़े किसानों के लिए निर्धारित किए जाने की बात सामने आई है। इससे छोटे किसानों को खरीदी केंद्रों में धान बेचने के लिए टोकन मिलने का अवसर प्राथमिकता से मिल सकेगा।
छोटे किसानों को टोकन में मिलेगी प्राथमिकता
धान खरीदी के दौरान छोटे किसानों को टोकन मिलने में परेशानी न हो, इसके लिए रोज जारी होने वाले टोकन में उनका हिस्सा 70 प्रतिशत रखा गया है। वहीं, बड़े किसानों के लिए 30 प्रतिशत टोकन निर्धारित होंगे। इस व्यवस्था का मकसद छोटे किसानों को खरीदी प्रक्रिया में प्राथमिकता देना और उन्हें अपना धान बेचने का अवसर उपलब्ध कराना है।
160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य
राज्य सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार के लिए धान खरीदी प्रदेश के किसानों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। खरीदी 15 नवंबर से शुरू होकर 31 जनवरी 2027 तक चलेगी।
प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक खरीदी
प्रकाशित जानकारी के अनुसार, धान खरीदी की अधिकतम सीमा प्रति एकड़ 21 क्विंटल निर्धारित की गई है। हालांकि, वास्तविक खरीदी निर्धारित औसत उपज और लागू नियमों के अनुसार होगी। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने पंजीयन, रकबे और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी पहले से जांच लें।
ई-टोकन और पंजीयन पर भी ध्यान देना होगा
धान बेचने के लिए किसानों को ई-टोकन लेना होगा। समाचार पत्र में प्रकाशित जानकारी के मुताबिक, खरीदी की निर्धारित तारीख से सात दिन पहले टोकन के लिए आवेदन करना होगा। इसके साथ ही एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य बताया गया है। किसानों को टोकन जारी करने की प्रक्रिया और संबंधित निर्देशों का पालन करना होगा।
छोटे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद
रोज जारी होने वाले टोकन में छोटे किसानों के लिए 70 प्रतिशत हिस्सा निर्धारित करने की व्यवस्था से उन्हें खरीदी का अवसर प्राथमिकता से मिल सकता है। इससे छोटे किसानों को टोकन के लिए इंतजार कम करने और निर्धारित समय में धान बेचने में मदद मिलने की उम्मीद है। अब इस व्यवस्था का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि खरीदी केंद्रों पर टोकन जारी करने और धान खरीदी की प्रक्रिया कितनी सुचारु रहती है।

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