हसदेव डुबान क्षेत्र में अवैध रूप से किया जा रहा मत्स्याखेट

कोरबा 05 जुलाई। प्रदेश शासन द्वारा मछलियों के प्रजनन काल को सुरक्षित रखने और जलीय जैव विविधता के संरक्षण के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 16 जून से 15 अगस्त तक दो माह की अवधि के लिए मत्स्याखेट पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाता है। इस दौरान किसी भी नदी, जलाशय या बांध में मछली पकडना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। इसके बावजूद कोरबा जिले के हसदेव डुबान क्षेत्र में शासन के आदेशों को खुलेआम चुनौती दी जा रही है।

जानकारी के अनुसार, बांगो स्थित हसदेव नदी जलाशय में इन दिनों प्रतिबंध के बावजूद बड़े पैमाने पर अवैध मत्स्याखेट किया जा रहा है। बाहरी बिचौलियों और मछली कारोबारियों द्वारा दिन-रात जलाशय में जाल डालकर मछलियों का शिकार किया जा रहा है। इससे न केवल शासन के आदेशों की धज्जियां उड़ रही हैं, बल्कि मछलियों के प्राकृतिक प्रजनन चक्र पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

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मत्स्याखेट बंद ऋतु के दौरान अवैध गतिविधियों की रोकथाम के लिए शासन द्वारा विशेष जांच एवं निगरानी दल गठित किया गया है।अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाकर जलाशय क्षेत्र में नियमित सर्चिंग, अवैध मत्स्याखेट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई तथा बाजारों में निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार विभागीय अमला केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित है और वास्तविक रूप से अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है।

इसका फायदा उठाकर बिचौलिये और बाहरी मछली कारोबारी खुलेआम मछलियों का दोहन कर रहे हैं।इस संबंध में क्षेत्र के जनपदसदस्य एवं सभापति भारत सिंह सिदार ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि जिले के सीमावर्ती क्षेत्र ग्राम पंचायत सिमगा के पारसमाल, डांड और सरपता क्षेत्र में बलदेव नगर, जिला सूरजपुर से आए लगभग आधा दर्जन बिचौलियों द्वारा खुलेआम अवैध रूप से मत्स्याखेट किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि शासन द्वारा गठित टीम महज एक दिखावा बनकर रह गई है और संबंधित विभाग केवल खानापूर्ति कर रहा है। यदि प्रशासन वास्तव में गंभीर होता तो प्रतिबंध अवधि में इस प्रकार खुलेआम मत्स्याखेट संभव नहीं हो पाता।

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बताया जा रहा है कि विस्थापित आदिवासी हसदेव जलाशय संघर्ष समिति एवं हसदेव जलाशय क्षेत्र की 22 पंजीकृत मत्स्य सहकारी समितियों के संयुक्त संगठन ने प्रजनन काल के दौरान दो माह तक पूर्ण प्रतिबंध लागू कराने की मांग को लेकर 9 जून 2026 को प्रबंध संचालक, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी मत्स्य महासंघ मर्यादित, रायपुर को लिखित ज्ञापन सौंपा था।ज्ञापन में मांग की गई थी कि मछलियों के संरक्षण एवं भविष्य में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए बंद ऋतु के नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए तथा अवैध मत्स्याखेट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इसके बावजूद क्षेत्र में अवैध गतिविधियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रजनन काल के दौरान मछलियों का शिकार किए जाने से उनकी संख्या में लगातार गिरावट आती है। इससेभविष्य में मत्स्य उत्पादन प्रभावित होता है और हजारों स्थानीय मछुआरों की आजीविका पर भी संकट उत्पन्न हो सकता है। हसदेव जलाशय क्षेत्र के अनेक परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मत्स्य व्यवसाय पर निर्भर हैं।

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