राजनैतिक व्यंग्य-समागम: जब रिकॉर्ड तोड़ने की धुन बन गई राजनीति का नया धर्म!

आज देश की राजनीति में एक अनोखी रेस चल रही है—अतीत के दिग्गजों को पछाड़ने की रेस। पेश हैं इस राजनैतिक महा-मुकाबले और रिकॉर्ड तोड़ती महत्वाकांक्षाओं पर दो धारदार व्यंग्य:

🛑 व्यंग्य 1: अब गांधीजी का रिकॉर्ड तोड़ने की धुन…!

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लेखक: विष्णु नागर

लगातार सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री बने रहने की रेस में मोदी जी, इंदिरा गांधी को पीछे छोड़ चुके हैं। उनका और उनके समर्थकों का दावा है कि 9 जून के बाद से वे हर दिन जवाहरलाल नेहरू को भी पछाड़ते जा रहे हैं।

वैसे मोदी जी नेहरू जी से हमेशा सशंकित रहते हैं। वे हर दस कदम आगे बढ़ने के बाद, ग्यारहवें कदम पर पीछे मुड़कर देखते हैं कि कहीं ‘चाचा नेहरू’ पीछे से आकर उनसे आगे निकलने का कोई षड़यंत्र तो नहीं कर रहे! आखिरकार, ‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी’ का मंत्र उन्हें बखूबी याद है।

🎯 अगला टारगेट: महात्मा गांधी को पछाड़ना!

नेहरू जी को तो ‘संघीय चाल, चेहरे और चरित्र’ के दम पर निपटाया जा चुका है, अब अगला नंबर महात्मा गांधी का है। गांधी जी का रिकॉर्ड तोड़ना ही अब सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसके लिए ‘महात्मा गांधी रिकॉर्ड तोड़ समिति’ का गठन भी हो चुका है, जिसके अध्यक्ष खुद गृहमंत्री हैं।

लेकिन समिति के सामने कुछ तकनीकी मुश्किलें हैं:

चतुर बनिया का दांव: गांधी जी चतुर थे, वे कभी प्रधानमंत्री बने ही नहीं। अगर बने होते, तो मोदी जी उनका रिकॉर्ड कब का नेस्तनाबूद कर चुके होते।

बैकग्राउंड का अंतर: दोनों गुजराती हैं, लेकिन गांधी के पिता दीवान थे। मोदी जी ने सोच-समझकर ‘चायवाले’ के रूप में अवतार लिया ताकि चुनाव जीतने में कोई बाधा न आए।

‘एंटायर’ डिग्री की कमी: मोदी जी ने ‘एंटायर पोलिटिकल साइंस’ में एम.ए. तो कर लिया, लेकिन जल्दबाजी में ‘एंटायर एल.एल.बी.’ करना भूल गए, वरना गांधी जी जैसी बैरिस्टरी से सीधे मुकाबला हो जाता।

जेल यात्रा का शून्य स्कोर: गांधी जी करीब 7 साल जेल में रहे, जबकि मोदी जी 8 घंटे के लिए भी थाने नहीं गए। आपातकाल (इमरजेंसी) में जेल जाने का सुनहरा मौका था, पर वे छिपकर ही रहे।

💡 तो फिर गांधी जी से बड़े कैसे बनें?

सत्याग्रह, सच, अहिंसा या एक धोती में शरीर ढंकने जैसे गांधीवादी तरीकों से तो पार पाना मुमकिन नहीं है। हिंदू-मुस्लिम एकता से भी साहेब को उतना ही परहेज है जितना कुछ लोगों को करेले से होता है। ऐसे में एकमात्र अचूक रास्ता बचता है: गांधी जी से ज़्यादा दिन ज़िंदा रहकर दिखाना!

दिनों का गणित: गांधी जी कुल 78 वर्ष (28,608 दिन) जीवित रहे थे। मोदी जी सितंबर में 76 वर्ष पूरे कर लेंगे। बस दो वर्ष और कुछ दिनों की बात है। जैसे ही साहेब 28,609वें दिन में प्रवेश करेंगे, वे ऑटोमेटिकली गांधी जी से बड़े हो जाएंगे!

ग्लोबल ख्याति का अंतर: मोदी जी के अनुसार, गांधी जी को तो दुनिया ने तब जाना जब 1982 में रिचर्ड एटनबरो ने उन पर फिल्म बनाई। जबकि मोदी जी महज 52 साल की उम्र में, साल 2002 के ‘गुजरात घटनाक्रम’ के बाद ही पूरी दुनिया (और अमेरिकी वीजा विभाग) में ‘कुख्यात’ यानी मशहूर हो चुके थे। महानता तो उन्हें 24 साल पहले ही मिल गई थी!

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👑 व्यंग्य 2: पीएम, पीएम, पीएम नंबर वन!

लेखक: राजेंद्र शर्मा

जो लोग बात-बात पर नेहरू जी के ‘देश का पहला प्रधानमंत्री’ होने की दुहाई देते थे, उनका मुंह अब बंद हो जाना चाहिए। मोदी जी ने इंदिरा जी को तो छोड़िए, उनके पिता जवाहरलाल नेहरू की लकीर को भी छोटा कर दिया है।

नेहरू जी के कुल 4398 दिनों के मुकाबले मोदी जी ने 4399 दिन की लंबी लकीर खींच दी है। 10 जून के बाद से वे लगातार इस अंतर को बढ़ा रहे हैं।

🎉 अभी तो पार्टी शुरू हुई है!

मंत्रियों का मंदिर-मंदिर जाकर भगवान को ‘थैंक यू’ कहना, एनडीए का अपनी किस्मत पर इतराना और सोशल मीडिया पर विदेशी नेताओं के बधाई संदेशों का दौर—यह सब तो बस शुरुआत है। अभी जनता का असली जश्न बाकी है।

लेकिन विरोधियों ने इस जश्न में भी रंग में भंग डालने की कोशिश की:

‘कॉकरोच’ और पेपर लीक: जहां मोदी जी इतिहास रचने में व्यस्त थे, वहीं कुछ तत्व ‘पेपर लीक’ का शोर मचाकर शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगने लगे। उन्हें नहीं पता कि मोदी राज में ‘इस्तीफा’ न देने का कड़ा सिद्धांत है।

ग्लोबल लीडर का ब्रेक: इन घरेलू विवादों से दूर, मोदी जी हफ्ते भर के ब्रेक पर यूरोप दौरे पर निकल गए हैं। वहां बड़े नेताओं से सीधे बधाई भी मिल जाएगी और लगे हाथ किसी नए ‘मेडल’ का जुगाड़ भी हो जाएगा।

🚢 तीन नाविकों की मौत और ‘हाउडी ट्रंप’ का याराना

विरोधी अब यह मुद्दा उठा रहे हैं कि अमेरिका-ईरान की लड़ाई में मारे गए तीन भारतीय नाविकों पर मोदी जी ने ट्रंप को बधाई के जवाब में कोई कड़ा विरोध क्यों नहीं जताया?

तर्क सीधा है: मिसाइल अमेरिका ने मारी, जहाज किसी और का था, समंदर पराया था। वे नाविक अपनी मर्जी से कमाने गए थे, सरकार के कहने पर नहीं। फिर भी जयशंकर ने मजबूरी में विरोध जता ही दिया है। अब क्या बच्चे की जान लोगे?

विरोधी चाहते हैं कि मोदी जी इन तीन नाविकों के चक्कर में अपने ‘डियर फ्रेंड’ ट्रंप से संबंध खराब कर लें और भारत-अमेरिका संबंध वापस नेहरू-इंदिरा के जमाने जैसे हो जाएं। लेकिन साहेब ‘नंबर वन’ के दर्जे से कभी समझौता नहीं करते। आख़िरकार, नमस्ते ट्रंप का ऐतिहासिक आयोजन नेहरू या वाजपेयी के बस का कहाँ था!

📊 इतिहास बनाम मोदी जी की तकनीकी जीत

व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के इतिहासकार तकनीकी दलीलें दे रहे हैं कि नेहरू 16 साल 282 दिन और इंदिरा 15 साल 356 दिन पीएम रहे थे, इसलिए मोदी जी को अभी उनका रिकॉर्ड तोड़ने में 4-5 साल लगेंगे।

लेकिन साहेब ने राममनोहर लोहिया की बात को सच साबित कर दिया—’जिंदा कौमें 5 साल इंतजार नहीं करतीं’:

इंदिरा जी का रिकॉर्ड इसलिए छोटा है क्योंकि उनके कार्यकाल में ‘ब्रेक’ था।

नेहरू जी का रिकॉर्ड इसलिए छोटा है क्योंकि शुरुआती 5 साल बिना चुनाव (अंतरिम सरकार) के थे।

इस तरह सारे गणित को किनारे लगाकर मोदी जी बन चुके हैं “ऑफिशियल पीएम नंबर वन”। अब कोई यह चीटिंग नहीं करेगा कि देश के ‘पहले’ प्रधानमंत्री तो नेहरू ही रहेंगे। पहले-आख़िरी से क्या होता है, ट्रंप की बधाई आ चुकी है, मतलब बात ख़त्म!

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