जांजगीर-चांपा: पति की मौत के बाद गोद में मासूम बच्ची को लिए इंसाफ के लिए दर-दर भटकती एक बेबस विधवा… और आरोप इतने गंभीर कि प्रशासनिक व्यवस्था पर ही बड़े सवाल खड़े कर दें। जांजगीर-चांपा से एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक महिला ने अपने ही ससुराल वालों और स्थानीय पार्षद पर पति के मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) से उसका नाम गायब कराने का संगीन आरोप लगाया है।
पीड़िता का सीधा सवाल है—”पति की मौत के बाद आखिर किसने खेला यह बड़ा खेल?”
📌 पूरा मामला क्या है?
पीड़िता जसवीर कौर ने वार्ड क्रमांक 24 के पार्षद और नगर पालिका परिषद संघ के उपाध्यक्ष अमरजीत खटकड़, अपनी सास जसमीत कौर, देवर परमवीर सिंह और बुआ सास जितू कौर के खिलाफ मोर्चा खोला है। जसवीर का आरोप है कि उनके पति स्वर्गीय हरदीप सिंह की मौत के बाद कथित तौर पर फर्जी एफिडेविट (शपथ पत्र) का सहारा लेकर मृत्यु प्रमाण पत्र से उनका और उनकी बेटी का नाम ही गायब करवा दिया गया।
🔹 शोक पत्र से ही शुरू हो गया था ‘खेल’
जसवीर कौर के मुताबिक:
पति की मौत के बाद जारी हुए शोक पत्र में भी उनका और उनकी बेटी सिमरजीत कौर का नाम नहीं था।
इसकी जानकारी उन्होंने पहले ही पार्षद अमरजीत खटकड़ को दी थी और साफ कहा था कि मृत्यु प्रमाण पत्र में पत्नी का नाम दर्ज होना चाहिए।
इसके बावजूद जब प्रमाण पत्र जारी हुआ, तो उसमें पत्नी की जगह मृतक की मां का नाम दर्ज कर दिया गया।
“जब सब जानते थे कि हरदीप सिंह शादीशुदा थे और उनकी एक बेटी भी है, तो एक शादीशुदा व्यक्ति के दस्तावेज से उसकी पत्नी और बच्ची का नाम कैसे गायब हो गया? यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश है।”
— जसवीर कौर (पीड़िता)
🚨 नया मोड़: सील-साइन कराने गई महिला से अभद्रता का आरोप
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब 17 जून 2026 को जसवीर कौर अपनी बेटी का नाम जमीन के दस्तावेजों में जुड़वाने के लिए आवेदन पर सील-साइन कराने पार्षद अमरजीत खटकड़ के पास पहुंचीं।
महिला का आरोप है कि:
पार्षद ने उन्हें बिना बताए उनके ससुराल वालों (सास, देवर और बुआ सास) को मौके पर बुला लिया।
इसके बाद पार्षद और ससुराल पक्ष के लोगों ने मिलकर पीड़िता और उसकी सहेली के साथ गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया।
पीड़िता का कहना है कि यह सब उन्हें डराने-धमकाने और उनके कानूनी हक से महरुम करने के लिए किया जा रहा है।
⚖️ कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत, प्रशासन के नोटिस के बाद भी कार्रवाई नहीं?
न्याय की आस में पीड़िता ने दो महीने पहले कलेक्टर जनदर्शन में इस धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद प्रशासन हरकत में आया और पीड़िता की सास जसमीत कौर को नोटिस जारी कर 3 दिनों के भीतर कथित रूप से फर्जी तरीके से बने मृत्यु प्रमाण पत्र को जमा करने का आदेश दिया।
लेकिन बड़ा सवाल यही है कि: नोटिस की अवधि बीत जाने के बाद भी अब तक कोई ठोस कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? आखिर जिम्मेदारों पर हाथ डालने से प्रशासन क्यों कतरा रहा है?
🔍 सुलगते सवाल: क्या मिलेगा इंसाफ?
पति को खोने के बाद अपने और अपनी मासूम बेटी सिमरजीत के अधिकारों के लिए लड़ रही जसवीर कौर आज भी न्याय की उम्मीद में बैठी हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
❓ क्या मृत्यु प्रमाण पत्र में हुए इस कथित खेल का सच जनता के सामने आएगा?
❓ क्या रसूखदार पार्षद, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और ससुराल पक्ष के खिलाफ निष्पक्ष जांच होगी?
❓ क्या एक बेबस विधवा और उसकी अनाथ बच्ची को उनका हक मिलेगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा?


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