
भारतीय मजदूर संघ और इंटक यूनियन के बीच कुसमुंडा क्षेत्र में श्रमिक राजनीति तेज हो गई है। बीते 06 मई 2026 को इंटक यूनियन को बड़ा झटका लगा, जब पूर्व वेलफेयर बोर्ड सदस्य सोनू पटेल के नेतृत्व में लगभग 370 सदस्य बीएमएस संगठन में शामिल हो गए।
पिछले कुछ महीनों से कुसमुंडा क्षेत्र में विभिन्न श्रमिक संगठनों के बीच सदस्य जोड़ने की होड़ मची हुई है। इससे पहले एटक यूनियन के करीब 200 सदस्य इंटक में शामिल हुए थे, वहीं HMS संगठन के पदाधिकारियों ने भी इंटक का दामन थामा था। लेकिन लगातार नए नेताओं और सदस्यों के प्रवेश के चलते पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा किए जाने के आरोप सामने आने लगे।
सूत्रों के अनुसार, इंटक संगठन के कई पुराने और वरिष्ठ पदाधिकारियों को कमेटी से बाहर किए जाने के बाद उनमें नाराजगी बढ़ी, जिसका परिणाम अब बड़े पैमाने पर बीएमएस में शामिल होने के रूप में सामने आया है। सदस्यता सत्यापन की प्रक्रिया नजदीक होने के कारण सभी संगठन अपनी ताकत बढ़ाने में जुटे हैं।
जानकारों का कहना है कि कुछ नए नेताओं द्वारा संगठन में बड़ी-बड़ी जिम्मेदारियां और बोर्ड में स्थान दिलाने के वादे किए जा रहे हैं। वहीं कर्मचारियों के बीच भी लगातार संगठन बदलने वाले नेताओं की छवि को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
कुसमुंडा क्षेत्र में पिछले लगभग 20 वर्षों से बीएमएस संगठन नंबर-1 की स्थिति में बना हुआ है, जबकि अन्य संगठनों की स्थिति समय-समय पर बदलती रही है। ऐसे में इंटक यूनियन से बड़ी संख्या में सदस्यों का बीएमएस में शामिल होना अन्य संगठनों की चिंता बढ़ा रहा है।
इधर हाल ही में भारतीय मजदूर संघ के अखिल भारतीय महामंत्री द्वारा कुसमुंडा क्षेत्र के कामगारों की समस्याओं को लेकर प्रबंधन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया है। साथ ही 15 मई 2026 से चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा भी की गई है। इस घोषणा के बाद नए और पुराने सदस्यों में उत्साह देखा जा रहा है तथा कामगारों को अपनी मांगें पूरी होने की उम्मीद बढ़ी है।
अब देखना होगा कि कुसमुंडा क्षेत्र की बदलती श्रमिक राजनीति में कौन सा संगठन बाजी मारता है।

Live Cricket Info


Leave a Reply