3 दिन बाद भी कोयले में हेराफ़ेरी करने वाले डिपो संचालक को पकड़ने में पुलिस नाकाम, सुपरवाइजर और ड्राइवर को पड़कर लूटी वाहवाही, खनिज विभाग की कार्रवाई ज़ीरो

कोयले में मिलावट, कोल डिपो का मास्टरमाइंड संचालक हुआ फरार, पुलिस ने ड्राइवर और डिपो सुपरवाईजर को भेजा जेल

बिलासपुर। रतनपुर क्षेत्र के कोल डिपो में कोयले की अफरा-तफरी का मामला सामने आया है। ट्रांसपोर्ट कंपनी के कर्मचारी ने इसकी शिकायत पुलिस से की है। इस पर पुलिस ने कोल डीपो के संचालक और उसके साथियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। और रतनपुर पुलिस ने मामले में ट्रेलर के ड्राइवर और कोल डीपो के सुपरवाईजर को गिरफ्तार किया है। लेकिन जो मुख्य आरोपी है डीपो संचालक वह फरार बताया जा रहा है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

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रतनपुर थाना प्रभारी आइपीएस अजय कुमार ने बताया कि दोना सागर में रहने वाले दिनेश पटेल(30) के डी रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड में मैनेजर हैं। उनकी कंपनी एनटीपीसी गाडरवारा के लिए गेवरा खदान से कोटा साइडिंग तक कोयले का परिवहन करती है। शुक्रवार को कंपनी का ड्राइवर मनोज कुमार प्रजापति खदान से कोयला लेकर कोटा साइडिंग के लिए निकला था। ड्राइवर गाड़ी लेकर समय पर साइडिंग तक नहीं पहुंचा। इस पर कंपनी के मैनेजर और कर्मचारियों ने उसकी पतासाजी की। इसी दौरान पता चला कि ड्राइवर कोयले को लेकर बेलतरा स्थित कश्यप कोल डीपो में अच्छी क्वालिटी के कोयले को बेचकर घटिया कोयला भर रहा है। कंपनी के मैनेजर ने इसकी शिकायत रतनपुर थाने में की है। ड्राइवर से पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही कोल डीपो के सुपरवाइजर को गिरफ्तार किया है। इस बीच कोल डीपो का संचालक आकाश सिंघल अपने ठिकाने से फरार हो गया है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

डिपो से हो रहा मिलावट का खेल

रतनपुर रोड में बेलतरा से लेकर सेंदरी और रायपुर रोड में कई कोल डीपो है। यहां पर ड्राइवरों से मिली भगत कर कोल डीपो के संचालक अच्छी क्वालिटी के कोयले को कम दाम में खरीद लेते हैं। इसके बदले खराब कोयला और पत्थर भरकर वजन बराबर कर दिया जाता है। इस तरह के मामले कई बार सामने आ चुके हैं। इस तरह के मामलों में कई बार खनिज व पुलिस विभाग पर भी मिली भगत के आरोप लगे हैं। इसके बाद भी न तो खनिज विभाग और न ही पुलिस कड़ी कार्रवाई करती है। इससे कोयले में मिलावट करने वालों के हौसले बुलंद है।

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कभी नहीं पकड़े जाते डिपो संचालक, खनिज विभाग और जिम्मेदार देते है संरक्षण

अब तक का यह रिकार्ड रहा है कि पुलिस ने कई दफा डिपो संचालकों और उनके कर्मचारियों पर कोयले में मिलावट करने के आरोप में अपराध दर्ज किया है। कई दफा पुलिस ने डिपो में दबिश देकर कोयले की अफरा-तफरी होते भी पकड़ा है, इसके बावजूद पुलिस के हाथ अब तक एक भी डिपो संचालक पकड़ में नहीं आ सका है। सूत्रों की माने तो पुलिस और खनिज विभाग के अधिकारी व कर्मचारी ही डिपो संचालकों को संरक्षण देने का काम कर रहे, जिसकी वजह से उनका मनोबल बढ़ा हुआ है।

सफेदपोश चला रहे डिपो, सेटिंग से होता है काम

जिले में दर्जनों ऐसे कोल डिपो हैं, जो पुलिस और खनिज विभाग के साथ सेटिंग में चल रहे। ये डिपो रात में गुलजार होते हैं, जहां पर कोयले की जमकर अफरा-तफरी होती है। इसके बाद बेधड़क गाड़ियों में लोड होकर अवैध कोयले का परिवहन भी होता है। इसके पीछे कई सफेदपोश भी हैं, जो यह काम कर रहे अथवा करवा रहे हैं। ऐसे में ज़िम्मेदार अफ़सरों की मिलीभगत से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

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