
नईदिल्ली। भारत आने वाले व्यापारिक जहाज अब संवेदनशील होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते समय अपनी लोकेशन बताने वाली ट्रैकिंग प्रणाली बंद कर रहे हैं। समुद्री आंकड़ों के अनुसार, जहाज ऐसा इसलिए कर रहे हैं ताकि वे ईरानी बलों की नजर में न आएं और संभावित हमलों से बच सकें।
क्या कहते हैं आंकड़े?
समुद्री खुफिया कंपनी कैप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, फारस की खाड़ी से भारत आने वाले करीब 62% तेल टैंकर और मालवाहक जहाज होर्मुज पार करते समय अपने ट्रांसपोंडर बंद कर देते हैं। 1 मई से 25 जून के बीच भारत कीओर आने वाले 73 जहाजों में से 45 ने इस दौरान अपनी पहचान, लोकेशन और गंतव्य की जानकारी प्रसारित नहीं की। 69 जहाजों में से 14 ओमान वाले मार्ग से गुजरे। 10 जहाज ईरान के नियंत्रण वाले मार्ग से होकर निकले।
नियम क्या कहते हैं?
अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार, सभी जहाजों के लिए ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम के जरिए हर समय अपनी पहचान, लोकेशन और गंतव्य की जानकारी प्रसारित करना जरूरी होता है। लेकिन खतरे वाले इलाकों में जहाज अब अपनी सुरक्षा के लिए इस सिस्टम को जानबूझकर बंद कर रहे हैं। समुद्री क्षेत्र में इस प्रक्रिया को ‘गोइंग डार्क’ कहा जाता है।
जहाज कौन-सा रास्ता चुन रहे हैं?
अधिकतर जहाज ओमान वाले समुद्री मार्ग का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस मार्ग का समर्थन अमरीका और ओमान करते हैं, हालांकि ईरान इसे मान्यता नहीं देता। ईरान के नियंत्रण वाले ट्रैफिक लेन से गुजरने वाले जहाज आमतौर पर ट्रांसपोंडर चालू रखते हैं, लेकिन कुछ जहाज वहां भी ट्रैकिंग सिस्टम बंद करके यात्रा कर रहे हैं।
क्या सैन्य एस्कॉर्ट से सुरक्षा बढ़ी है?
विशेषज्ञों के अनुसार, इसका असर केवल सीमित रहा है। मई की शुरुआत में अमरीका ने ओमान वाले रास्ते पर जहाजों को सैन्य सुरक्षा देने की व्यवस्था शुरू की थी। बाद में ओमान और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन इससे जुड़े। अभियान शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद काफी हद तक सीमित कर दिया गया। मई में ही भारतीय वाला एक जहाज संदिग्ध ईरानी हमले के बाद डूब गया था।

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