थानेदार के निजी वाहन चालक ने दिखाया रौब…..आरक्षक ने लगाई जमकर फटकार……जानिए क्या पूरा मामला…..

थानेदार के निजी वाहन चालक ने दिखाया रौब…..आरक्षक ने लगाई जमकर फटकार……जानिए क्या पूरा मामला…..


थाने में कुर्सी खाली थी… और मौका बड़ा! असली थानेदार कहीं बाहर ड्यूटी पर थे, तो उनके ड्राइवर ने ही ठान लिया – “अब तो मैं ही साहब!” बस फिर क्या था — हवालात से लेकर मेन गेट तक सबको आदेश मिलने लगे। आरक्षक चुप रहे, पर जब ‘डमी थानेदार’ जवानों को आदेश,सबको रौब — सब कुछ ऐसे जैसे पूरा थाना उसी के हवाले हो।  तब हद बढ़ी, तो आवाज़ उठी और वीडियो वायरल हो गया।

बिलासपुर–सत्ता और विपक्ष के राजनीतिक हस्तियों के जुआ में पकड़े जाने का मामला शांत भी नहीं हुआ था,कि फिर एक नए मामले में सिविल लाइन थाना सुर्खियों आ गया।आपको बताते चले कि रविवार की देर रात को थाने के मुख्य द्वारा में हो रही बहस बाजी और चिल्लम चिल्ली ने एक नया मोड ले लिया।जहां पर सिविल लाइन थाने के थाना प्रभारी सुमम्त साहू के निजी वाहन चालक ने थाने में तैनात आरक्षकों के बीच चुगली करके विवाद को भड़का दिया।लेकिन आरक्षकों के आपसी सामंजस्य ने इस विवाद को सुलगने से पहले ही ठंडा कर दिया।आरक्षकों के आपसी सामंजस्य से बात को आगे ना बढ़ाते हुए चुगल खोरी करने वाले वाहन चालक को आरक्षकों ने समझाइश देना का प्रयास किए तो  वह अपने आप थानेदार से कम नहीं आंकते हुए आरक्षकों पर अपना रौब दिखाने लगा।जिसके बाद एक आरक्षक ने जमकर उस वाहन चालक को लताड़ लगाई।इसी बीच वाहन चालक के बचाव में कुछ बाहरी लोग और मीडिया कर्मी  भी वहां पहुंच गए और मौके का फायदा उठाते हुए अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए इस घटनाक्रम को क़ैद करने की जुगत में लग गए।इस मुद्दे को लेकर अपनी निजी खुन्नस को निकालने और वाहन चालक को बचाने के लिए इसे गरमाने और आरक्षकों के खिलाफ माहौल बनाने में एडी चोटी लगा दिए।मामला थाना परिसर और थाने से जुड़ा होने पर आरक्षकों ने तत्काल अपने उच्च अधिकारियों से अवगत करा दिया गया।

विवाद का मूल कारण
सूत्र बताते है कि विवाद का मूल कारण पेट्रोलिंग पुलिस जवानों की ड्यूटी समाप्त हुई और वह थाने परिसर में शराब खोरी कर रहे थे।इसी बीच एक मीडिया कर्मी वहां पहुंच गया और वह इनका वीडियो बना पाया की नहीं इन आरक्षकों की नजर उस मीडिया कर्मी पर पड़ गई और सभी वहां से बहार निकलकर आ गए।इसी बीच थानेदार का वाहन  चालक उन आरक्षकों को बताया कि इस मीडिया कर्मी को उस आरक्षक ने भेजा है।बस फिर क्या इसी बात पर विवाद हुआ और वाहन चालक थानेदार की गैरमौजूदगी में अपने आप थानेदार से कम नहीं समझते हुए थानेदार की तरह बात करने लगा।

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